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Revision Guide Class 10-12 / JEE / NEET

इंडियम (In): गुणधर्म, अभिक्रियाएँ और उपयोग

By Periodic Table India
CBSE / JEE Prep Notes
- Indium - Chemical Elements - p-block elements - JEE Chemistry - NEET Chemistry - CBSE Chemistry

परिचय: इंडियम क्यों महत्वपूर्ण है

इंडियम (In) आवर्त सारणी के समूह 13 से संबंधित एक नरम, चांदी-सफेद, आघातवर्धनीय धातु है। इसके अद्वितीय गुणधर्म, विशेष रूप से यौगिक रूप में इसकी पारदर्शिता और चालकता, इसे आधुनिक तकनीक में अपरिहार्य बनाते हैं। टचस्क्रीन और लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले (LCDs) से लेकर उन्नत सौर कोशिकाओं और LED प्रकाश व्यवस्था तक, इंडियम कई रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कार्यक्षमता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी दुर्लभता इसके आर्थिक मूल्य में योगदान करती है और इसके अनुप्रयोगों तथा सतत स्रोतों की निरंतर खोज को बढ़ावा देती है।

CBSE/JEE त्वरित पुनरीक्षण नोट्स

  • परमाणु क्रमांक (Z): 49
  • परमाणु द्रव्यमान: 114.818 u
  • समूह: 13 (बोरॉन परिवार, p-ब्लॉक तत्व)
  • आवर्त: 5
  • ब्लॉक: p-ब्लॉक
  • सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: +3 (सर्वाधिक स्थिर), +1 (अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण कम स्थिर)
  • प्रकृति: नरम, चांदी-सफेद, तन्य, आघातवर्धनीय धातु
  • गलनांक: 156.6 °C (अपेक्षाकृत कम)
  • क्वथनांक: 2072 °C
  • घनत्व: 7.31 g/cm³
  • विद्युत ऋणात्मकता (पॉलिंग पैमाना): 1.78

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और बंधन व्यवहार

मूल अवस्था इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Kr] 4d¹⁰ 5s² 5p¹

संयोजकता इलेक्ट्रॉन: इंडियम में तीन संयोजकता इलेक्ट्रॉन (5s² 5p¹) होते हैं।

बंधन व्यवहार: इंडियम आमतौर पर अपनी मौलिक अवस्था में धात्विक बंधन प्रदर्शित करता है। यौगिकों में, यह मुख्य रूप से अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक तत्वों के साथ आयनिक बंधन और दूसरों के साथ सहसंयोजक बंधन बनाता है।

  • ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:
    • +3 ऑक्सीकरण अवस्था: यह सबसे सामान्य और स्थिर ऑक्सीकरण अवस्था है, जो तीनों संयोजकता इलेक्ट्रॉनों (5s² 5p¹) के निष्कासन से उत्पन्न होती है।
    • +1 ऑक्सीकरण अवस्था: +1 ऑक्सीकरण अवस्था भी देखी जाती है लेकिन यह +3 की तुलना में कम स्थिर होती है। इसका कारण अक्रिय युग्म प्रभाव है, जहाँ 5s² इलेक्ट्रॉन, अंतराली d-इलेक्ट्रॉनों द्वारा कमजोर परिरक्षण के कारण, बंधन में भाग लेने के अनिच्छुक होते हैं, जिससे प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है और 5s इलेक्ट्रॉनों का नाभिक की ओर प्रबल आकर्षण होता है।

महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ

इंडियम मध्यम रूप से अभिक्रियाशील है। इसका रासायनिक व्यवहार गैलियम और थैलियम के समान है, जिसमें +3 ऑक्सीकरण अवस्था +1 की तुलना में अधिक स्थिर होती है, हालांकि समूह में नीचे जाने पर +1 की स्थिरता बढ़ती है (Ga < In < Tl)।

1. वायु/ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया

इंडियम कमरे के तापमान पर शुष्क हवा में स्थिर रहता है। जब इसे हवा या ऑक्सीजन में गर्म किया जाता है, तो यह इंडियम(III) ऑक्साइड बनाता है।

  • 4In(s) + 3O₂(g) → 2In₂O₃(s)

2. हैलोजेन के साथ अभिक्रिया

इंडियम हैलोजेन (X₂) के साथ अभिक्रिया करके ट्राईहैलाइड (InX₃) बनाता है।

  • 2In(s) + 3Cl₂(g) → 2InCl₃(s) (इंडियम(III) क्लोराइड)
  • 2In(s) + 3Br₂(l) → 2InBr₃(s) (इंडियम(III) ब्रोमाइड)
  • 2In(s) + 3I₂(s) → 2InI₃(s) (इंडियम(III) आयोडाइड)

मोनोहेलाइड (InX) और डाईहेलाइड (InX₂) भी मौजूद होते हैं, लेकिन वे अक्सर मिश्रित-संयोजकता वाले यौगिक होते हैं, उदाहरण के लिए, InBr बहुलक होता है। InCl और InBr, InX₃ को In धातु के साथ गर्म करके बनाए जा सकते हैं।

  • 2InCl₃(s) + 4In(s) → 6InCl(s) (इंडियम(I) क्लोराइड का निर्माण)

3. अम्लों के साथ अभिक्रिया

इंडियम अधिकांश अम्लों के साथ अभिक्रिया करता है।

  • तनु अम्ल (अनाक्सीकारक): इंडियम तनु अनाक्सीकारक अम्लों जैसे HCl और H₂SO₄ के साथ धीरे-धीरे अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है, जिससे In(III) लवण बनते हैं।

    • 2In(s) + 6HCl(aq) → 2InCl₃(aq) + 3H₂(g)
    • 2In(s) + 3H₂SO₄(dilute) → In₂(SO₄)₃(aq) + 3H₂(g)
  • ऑक्सीकारक अम्ल (उदाहरण के लिए, HNO₃): इंडियम ऑक्सीकारक अम्लों के साथ अभिक्रिया करके इंडियम(III) लवण बनाता है, अक्सर हाइड्रोजन के उत्सर्जन के बिना।

    • In(s) + 4HNO₃(conc.) → In(NO₃)₃(aq) + NO(g) + 2H₂O(l) (सांद्र HNO₃ के साथ उदाहरण)

4. क्षारों के साथ अभिक्रिया

इंडियम(III) हाइड्रॉक्साइड, In(OH)₃, उभयधर्मी होता है, जिसका अर्थ है कि यह अम्लों और प्रबल क्षारों दोनों के साथ अभिक्रिया कर सकता है। हालांकि, इसकी अम्लीय प्रकृति Al(OH)₃ की तुलना में कमजोर होती है।

  • अम्लों के साथ अभिक्रिया:

    • In(OH)₃(s) + 3H⁺(aq) → In³⁺(aq) + 3H₂O(l)
  • प्रबल क्षारों के साथ अभिक्रिया:

    • In(OH)₃(s) + OH⁻(aq) → [In(OH)₄]⁻(aq) (टेट्राहाइड्रॉक्सोइंडेट(III) आयन)

औद्योगिक और जैविक महत्व

औद्योगिक महत्व

  1. इंडियम टिन ऑक्साइड (ITO): यह सबसे महत्वपूर्ण अनुप्रयोग है। ITO एक पारदर्शी विद्युत चालक है, जो इसके लिए महत्वपूर्ण है:
    • LCDs और टचस्क्रीन: स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर मॉनिटर में उपयोग किया जाता है।
    • सौर पैनल: एक पारदर्शी इलेक्ट्रोड के रूप में।
    • OLEDs और प्लाज्मा डिस्प्ले: इलेक्ट्रोड के लिए।
  2. कम गलनांक वाली मिश्रधातुएँ: इंडियम कम गलनांक वाली मिश्रधातुएँ बनाता है, जिनका उपयोग इनमें होता है:
    • सोल्डर: विशेष रूप से नाजुक इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए जो उच्च तापमान का सामना नहीं कर सकते।
    • थर्मल फ्यूज और स्प्रिंकलर सिस्टम: गलनीय लिंक के रूप में।
  3. LEDs (प्रकाश उत्सर्जक डायोड): इंडियम गैलियम नाइट्राइड (InGaN) एक प्रमुख अर्धचालक सामग्री है जिसका उपयोग नीले और सफेद LED में किया जाता है।
  4. परमाणु अनुप्रयोग: इंडियम का उपयोग परमाणु रिएक्टरों में नियंत्रण छड़ों में किया जाता है क्योंकि इसमें न्यूट्रॉन अवशोषण क्रॉस-सेक्शन उच्च होता है।
  5. कोटिंग्स: विभिन्न धातुओं के लिए संक्षारण-प्रतिरोधी कोटिंग के रूप में उपयोग किया जाता है, खासकर एयरोस्पेस अनुप्रयोगों में।

जैविक महत्व

  • विषाक्तता: इंडियम और इसके यौगिकों को आमतौर पर कम तीव्र विषाक्तता वाला माना जाता है, लेकिन लंबे समय तक संपर्क या उच्च खुराक हानिकारक हो सकती है, मुख्य रूप से गुर्दों और यकृत को प्रभावित करती है। इंडियम धूल या धुएं से श्वसन संबंधी जलन हो सकती है।
  • चिकित्सीय आइसोटोप: रेडियोधर्मी आइसोटोप जैसे इंडियम-111 (¹¹¹In) का उपयोग परमाणु चिकित्सा में नैदानिक इमेजिंग (उदाहरण के लिए, ट्यूमर का पता लगाना, सेरिब्रोस्पाइनल द्रव अध्ययन) के लिए किया जाता है।