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क्रिप्टन (Kr): गुणधर्म, उपयोग और अभिक्रियाएँ JEE/NEET और CBSE के लिए

By Periodic Table India
CBSE / JEE Prep Notes
- Krypton - Noble Gas - Group 18 - Chemistry - JEE - NEET - CBSE

परिचय

क्रिप्टन (Kr) एक रासायनिक तत्व, एक उत्कृष्ट गैस और आवर्त सारणी के समूह 18 का सदस्य है। इसकी सामान्य निष्क्रियता के बावजूद, क्रिप्टन अपने अद्वितीय स्पेक्ट्रोस्कोपिक गुणों के कारण विशेष प्रकाश व्यवस्था, उच्च-गति फोटोग्राफी और लेजर प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण अनुप्रयोग पाता है। इसके रासायनिक और भौतिक विशेषताओं को समझना JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

CBSE/JEE त्वरित पुनरीक्षण नोट्स

यहाँ क्रिप्टन के प्रमुख गुणधर्म दिए गए हैं जो परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं:

  • प्रतीक: Kr
  • परमाणु संख्या (Z): 36
  • परमाणु द्रव्यमान (A): 83.798 u (लगभग 84 u)
  • समूह: 18 (उत्कृष्ट गैसें)
  • आवर्त: 4
  • ब्लॉक: p-ब्लॉक
  • प्रकृति: मानक तापमान और दबाव पर रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन, गैर-ज्वलनशील गैस। एकपरमाणुक।
  • इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Ar] 3d¹⁰ 4s² 4p⁶
  • संयोजकता: सामान्यतः 0 (अपनी उच्च आयनन ऊर्जा के कारण विशिष्ट, अत्यधिक परिस्थितियों में KrF₂ जैसे यौगिक बनाता है)।
  • आयनन एन्थैल्पी: उच्च (प्रथम IE: 1350.8 kJ/mol)
  • इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी: नगण्य/धनात्मक
  • विद्युत ऋणात्मकता (पॉलिंग पैमाना): इसकी निष्क्रियता के कारण सामान्यतः निर्दिष्ट नहीं की जाती है, लेकिन यौगिक निर्माण के लिए बहुत कम होती है।
  • घनत्व (STP पर): 3.749 g/L
  • क्वथनांक: -153.22 °C (119.93 K)
  • गलनांक: -157.36 °C (115.79 K)
  • उपस्थिति: पृथ्वी के वायुमंडल में सूक्ष्म मात्रा में (आयतन के अनुसार लगभग 1 ppm)।

इलेक्ट्रॉन विन्यास और बंधन व्यवहार

इलेक्ट्रॉन विन्यास

क्रिप्टन की परमाणु संख्या 36 है, जिसका अर्थ है कि इसमें 36 इलेक्ट्रॉन हैं। इसका मूल अवस्था इलेक्ट्रॉन विन्यास है: 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d¹⁰ 4s² 4p⁶

संक्षिप्त (संघनित) इलेक्ट्रॉन विन्यास पिछले उत्कृष्ट गैस, आर्गन (Ar) का उपयोग करता है, जिसमें 18 इलेक्ट्रॉन होते हैं: [Ar] 3d¹⁰ 4s² 4p⁶

यह विन्यास एक पूरी तरह से भरे हुए संयोजी कोश (8 इलेक्ट्रॉनों के साथ n=4 कोश, 4s² 4p⁶, और एक पूरी तरह से भरा हुआ d-उपकोश) को दर्शाता है।

बंधन व्यवहार

एक उत्कृष्ट गैस के रूप में, क्रिप्टन अपने सबसे बाहरी कोश में पूर्ण अष्टक के कारण असाधारण स्थिरता प्रदर्शित करता है। यह निम्नलिखित की ओर ले जाता है:

  • उच्च आयनन एन्थैल्पी: एक इलेक्ट्रॉन को हटाने के लिए महत्वपूर्ण मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • लगभग शून्य इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी: इसमें इलेक्ट्रॉन स्वीकार करने की बहुत कम प्रवृत्ति होती है।
  • रासायनिक निष्क्रियता: यह सामान्य परिस्थितियों में रासायनिक बंधन नहीं बनाता है।

हालांकि, अत्यधिक परिस्थितियों (जैसे, उच्च दबाव, उच्च तापमान, विद्युत निर्वहन, या पराबैंगनी विकिरण) और अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक तत्वों (मुख्य रूप से फ्लोरीन) की उपस्थिति में, क्रिप्टन को यौगिक बनाने के लिए मजबूर किया जा सकता है। यह मुख्य रूप से क्रिप्टन डाइफ्लोराइड (KrF₂) के साथ देखा जाता है। इसकी आयनन ऊर्जा अधिक होने और परमाणु आकार छोटा होने के कारण इसकी अभिक्रियाशीलता क्सीनन की तुलना में कम होती है, जिससे इसके संयोजी इलेक्ट्रॉन अधिक कसकर बंधे होते हैं।

महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ

क्रिप्टन की रसायन विज्ञान अन्य तत्वों की तुलना में सीमित है। सबसे महत्वपूर्ण और अच्छी तरह से अध्ययन किया गया यौगिक क्रिप्टन डाइफ्लोराइड (KrF₂) है।

1. क्रिप्टन डाइफ्लोराइड (KrF₂) का संश्लेषण

क्रिप्टन डाइफ्लोराइड को क्रिप्टन गैस की फ्लोरीन गैस के साथ विशिष्ट, ऊर्जावान परिस्थितियों में अभिक्रिया कराकर संश्लेषित किया जाता है:

Kr(g) + F₂(g) \xrightarrow\{\text\{Electrical Discharge / UV Radiation, -196°C\}\} KrF₂(s)

  • स्थितियाँ: Kr-Kr और F-F बंधों को तोड़ने और Kr-F बंधों के निर्माण के लिए उच्च सक्रियण ऊर्जा को दूर करने हेतु कम तापमान (उदाहरण के लिए, तरल नाइट्रोजन तापमान, -196°C), तीव्र पराबैंगनी विकिरण, या विद्युत निर्वहन की आवश्यकता होती है।
  • गुणधर्म: KrF₂ एक सफेद क्रिस्टलीय ठोस है, अत्यधिक अस्थिर है, और एक शक्तिशाली फ्लोरीनीकरण और ऑक्सीकरण कारक है।

2. क्रिप्टन डाइफ्लोराइड (KrF₂) की अभिक्रियाएँ

KrF₂ एक प्रबल लुईस अम्ल और एक असाधारण रूप से प्रबल ऑक्सीकारक है। यह प्रबल लुईस अम्लों के साथ आसानी से अभिक्रिया करके KrF⁺ और Kr₂F₃⁺ आयन बनाता है।

उदाहरण अभिक्रिया (एक KrF⁺ लवण का निर्माण): KrF₂(s) + AsF₅(g) \rightarrow [KrF⁺][AsF₆⁻](s)

  • इस अभिक्रिया में, KrF₂ AsF₅ के लिए एक फ्लोराइड आयन दाता (लुईस क्षार) के रूप में कार्य करता है, जिससे जटिल ऋणायन AsF₆⁻ और KrF⁺ धनायन बनता है। यह उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाओं वाले स्थिर स्पीशीज़ बनाने की इसकी क्षमता को उजागर करता है, हालांकि समग्र यौगिक अत्यधिक अभिक्रियाशील रहता है।

अपनी उच्च ऑक्सीकरण शक्ति के कारण, KrF₂ सोने को AuF₅ में ऑक्सीकृत कर सकता है, जिससे यह उन कुछ अभिकर्मकों में से एक बन जाता है जो सीधे सोने के साथ अभिक्रिया करने में सक्षम हैं।

औद्योगिक और जैविक महत्व

औद्योगिक महत्व

  1. प्रकाश व्यवस्था:
    • तापदीप्त बल्ब: क्रिप्टन का उपयोग कुछ तापदीप्त प्रकाश बल्बों में (अक्सर आर्गन के साथ मिश्रित) टंगस्टन फिलामेंट के वाष्पीकरण दर को कम करने के लिए किया जाता है, जिससे यह बढ़ी हुई चमक और लंबे जीवन के लिए उच्च तापमान पर जल पाता है।
    • प्रतिदीप्त लैंप: कुछ उच्च-दक्षता वाले प्रतिदीप्त लैंप में उपयोग किया जाता है।
    • डिस्चार्ज लैंप: विद्युत रूप से उत्तेजित होने पर एक चमकदार, सफेद प्रकाश उत्पन्न करता है।
  2. लेजर:
    • क्रिप्टन फ्लोराइड (KrF) एक्सिमर लेजर: ये लेजर पराबैंगनी प्रकाश (248 nm) उत्पन्न करते हैं और इनका उपयोग माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (जैसे, माइक्रोप्रोसेसर) के निर्माण के लिए फोटोलिथोग्राफी में, परमाणु संलयन अनुसंधान में और नेत्र शल्य चिकित्सा में किया जाता है।
  3. फोटोग्राफी:
    • उच्च-गति फोटोग्राफी: क्रिप्टन-भरे फ्लैश लैंप बहुत तेज, तीव्र प्रकाश के फ्लैश उत्पन्न करते हैं, जो उच्च-गति फोटोग्राफी के लिए उपयोगी होते हैं।
  4. इंसुलेशन: क्रिप्टन की कम तापीय चालकता इसे एक अच्छी इन्सुलेटिंग गैस बनाती है, जिसका उपयोग कभी-कभी डबल-पैन वाली खिड़कियों में किया जाता है।

जैविक महत्व

  • निष्क्रियता: क्रिप्टन जैविक रूप से निष्क्रिय है। इसका कोई जैविक कार्य ज्ञात नहीं है और यह गैर-विषाक्त है।
  • चिकित्सा अनुसंधान: रेडियोधर्मी समस्थानिक क्रिप्टन-81m (⁸¹mKr) का उपयोग परमाणु चिकित्सा में फेफड़ों के वेंटिलेशन/परफ्यूजन स्कैन (V/Q स्कैन) के लिए पल्मोनरी एम्बोलिज्म का निदान करने के लिए किया जाता है।