मैग्नीशियम (Mg) का धातु विज्ञान और औद्योगिक निष्कर्षण
प्राकृतिक उपलब्धता और प्रमुख अयस्क
मैग्नीशियम पृथ्वी की पर्पटी में आठवाँ सबसे प्रचुर तत्व है और समुद्र के पानी में तीसरा सबसे प्रचुर घुला हुआ तत्व है। अपनी उच्च अभिक्रियाशीलता के कारण यह हमेशा संयुक्त अवस्था में पाया जाता है।
- समुद्र का पानी और ब्राइन: घुले हुए मैग्नीशियम क्लोराइड (
MgCl₂) का एक बड़ा भंडार। - मैग्नेसाइट:
MgCO₃(मैग्नीशियम कार्बोनेट)। - डोलोमाइट:
MgCO₃·CaCO₃(मैग्नीशियम और कैल्शियम का मिश्रित कार्बोनेट)। - कार्नालाइट:
KCl·MgCl₂·6H₂O(पोटेशियम क्लोराइड और मैग्नीशियम क्लोराइड का हाइड्रेटेड दोहरा लवण)। - एस्बेस्टस: सिलिकेट खनिज जैसे क्राइसोलाइट
Mg₃Si₂O₅(OH)₄।
अयस्क का सांद्रण
मैग्नीशियम के प्राथमिक औद्योगिक स्रोत समुद्र का पानी, ब्राइन और डोलोमाइट हैं। सांद्रण प्रक्रिया स्रोत के आधार पर भिन्न होती है।
समुद्र के पानी से (डाउ प्रक्रिया सिद्धांत)
- मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड का अवक्षेपण: समुद्र के पानी (जिसमें घुला हुआ
MgCl₂होता है) को चूने के दूध (Ca(OH)₂) के साथ उपचारित किया जाता है, जिसे चूना पत्थर (CaCO₃ \rightarrow CaO + CO₂) को गर्म करके और बुझाकर (CaO + H₂O \rightarrow Ca(OH)₂) तैयार किया जाता है।MgCl₂(aq) + Ca(OH)₂(aq) \rightarrow Mg(OH)₂(s) + CaCl₂(aq)मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड अत्यधिक अघुलनशील होता है और अवक्षेपित हो जाता है। - मैग्नीशियम क्लोराइड में रूपांतरण: अवक्षेपित
Mg(OH)₂को छाना जाता है, धोया जाता है, और फिर हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) के साथ अभिक्रिया कराई जाती है।Mg(OH)₂(s) + 2HCl(aq) \rightarrow MgCl₂(aq) + 2H₂O(l) - निर्जलीकरण: परिणामी
MgCl₂विलयन को वाष्पीकृत किया जाता है और सावधानीपूर्वक निर्जलित करके निर्जलMgCl₂प्राप्त किया जाता है। जल-अपघटन को रोकने के लिए पूर्ण निर्जलीकरण महत्वपूर्ण है:MgCl₂·6H₂O(s) \rightarrow MgCl₂(s) + 6H₂O(g)(जल-अपघटन को दबाने के लिएHClगैस के वातावरण में गर्म करना आवश्यक है:MgCl₂ + 2H₂O \rightarrow MgO + 2HCl)।
डोलोमाइट से
- निस्तापन (कैल्सीनेशन): डोलोमाइट (
MgCO₃·CaCO₃) को उच्च तापमान पर निस्तापित किया जाता है ताकि मैग्नीशियम ऑक्साइड और कैल्शियम ऑक्साइड का मिश्रण बन सके।MgCO₃·CaCO₃(s) \rightarrow MgO(s) + CaO(s) + 2CO₂(g) - क्लोराइड में रूपांतरण: मिश्रित ऑक्साइड को फिर ऊपर वर्णित अनुसार
HClका उपयोग करकेMgCl₂में परिवर्तित किया जा सकता है, याMgOका उपयोग पिजन प्रक्रिया (थर्मल अपचयन) में किया जा सकता है।
कच्चे धातु में अपचयन
मैग्नीशियम का औद्योगिक अपचयन मुख्य रूप से विद्युत अपघटन द्वारा प्राप्त किया जाता है। थर्मल अपचयन विधियों का भी उपयोग किया जाता है, लेकिन प्राथमिक उत्पादन के लिए कम बार।
विद्युत अपघटनी अपचयन (डाउ प्रक्रिया)
यह मैग्नीशियम उत्पादन की मुख्य विधि है।
- विद्युत अपघट्य: निर्जल
MgCl₂कोNaClऔरCaCl₂(याKCl) के साथ गलाया जाता है। ये लवण निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं:- विद्युत अपघट्य मिश्रण के गलनांक को कम करना (शुद्ध
MgCl₂के लिए 714°C से ~450°C तक)। - विद्युत चालकता बढ़ाना।
- विद्युत अपघट्य के घनत्व को कम करना, जिससे पिघला हुआ मैग्नीशियम तैर सके और आसानी से एकत्र किया जा सके।
- विद्युत अपघट्य मिश्रण के गलनांक को कम करना (शुद्ध
- सेल डिजाइन: एक विद्युत अपघटनी सेल में आमतौर पर अपवर्तक सामग्री से ढका हुआ एक स्टील टैंक होता है। ग्रेफाइट की छड़ें एनोड के रूप में कार्य करती हैं, और स्टील की प्लेटें कैथोड के रूप में कार्य करती हैं।
- विद्युत अपघटन: पिघले हुए विद्युत अपघट्य से लगभग 700°C पर दिष्ट धारा प्रवाहित की जाती है।
- कैथोड पर (स्टील): मैग्नीशियम आयन इलेक्ट्रॉन प्राप्त करते हैं और पिघली हुई मैग्नीशियम धातु में अपचयित हो जाते हैं।
Mg²⁺(l) + 2e⁻ \rightarrow Mg(l) - एनोड पर (ग्रेफाइट): क्लोराइड आयन इलेक्ट्रॉन खो देते हैं और क्लोरीन गैस में ऑक्सीकृत हो जाते हैं।
2Cl⁻(l) \rightarrow Cl₂(g) + 2e⁻
- कैथोड पर (स्टील): मैग्नीशियम आयन इलेक्ट्रॉन प्राप्त करते हैं और पिघली हुई मैग्नीशियम धातु में अपचयित हो जाते हैं।
- संग्रहण: पिघला हुआ मैग्नीशियम, विद्युत अपघट्य से हल्का होने के कारण, शीर्ष पर तैरता है और इसे समय-समय पर साइफन द्वारा निकाल लिया जाता है। क्लोरीन गैस को एक मूल्यवान उप-उत्पाद के रूप में एकत्र किया जाता है और
HClके उत्पादन के लिए पुनर्चक्रित किया जा सकता है।
थर्मल अपचयन (पिजन प्रक्रिया)
इस प्रक्रिया में फेरोसिलिकॉन (FeSi) के साथ MgO (निस्तापित डोलोमाइट या मैग्नेसाइट से प्राप्त) का अपचयन शामिल है।
- अभिकारक: निस्तापित डोलोमाइट (
MgO·CaO) को फेरोसिलिकॉन (लोहे और सिलिकॉन का एक मिश्रधातु) के साथ मिलाया जाता है। - अभिक्रिया: मिश्रण को उच्च तापमान (1100-1200°C) पर एक निर्वात भट्टी में गर्म किया जाता है। सिलिकॉन
MgOको अपचयित करता है, औरCaOसिलिका के लिए एक स्कैवेंजर (अपमार्जक) के रूप में कार्य करता है, जो संतुलन को दाईं ओर स्थानांतरित करता है।2(MgO·CaO)(s) + SiFe(s) \rightarrow 2Mg(g) + Ca₂SiO₄(s) + Fe(s) - आसवन: मैग्नीशियम इन तापमानों पर वाष्पीकृत होता है और कच्चे मैग्नीशियम का उत्पादन करने के लिए भट्टी के एक ठंडे हिस्से में संघनित होता है। यह प्रक्रिया ऊर्जा-गहन है और आमतौर पर छोटे पैमाने के उत्पादन या विशिष्ट अनुप्रयोगों के लिए उपयोग की जाती है।
शोधन और शुद्धिकरण
विद्युत अपघटन या थर्मल अपचयन से प्राप्त कच्चे मैग्नीशियम की शुद्धता आमतौर पर 99-99.8% होती है। उच्च शुद्धता प्राप्त करने के लिए आगे शुद्धिकरण किया जाता है।
- आसवन: उच्च शुद्धता वाले मैग्नीशियम प्राप्त करने की यह सबसे आम विधि है।
- कच्चे मैग्नीशियम को एक निर्वात भट्टी में उसके क्वथनांक (1091°C) तक गर्म किया जाता है।
- मैग्नीशियम वाष्पीकृत होता है, और लोहे, सिलिकॉन और घुले हुए क्लोराइड जैसे कम वाष्पशील अशुद्धियों को पीछे छोड़ देता है।
- शुद्ध मैग्नीशियम वाष्प को फिर भट्टी के एक ठंडे हिस्से में संघनित किया जाता है ताकि 99.99% तक शुद्धता वाली मैग्नीशियम धातु प्राप्त हो सके।
- फ्लक्स शोधन: पिघले हुए कच्चे मैग्नीशियम को विशिष्ट फ्लक्स (क्लोराइड और फ्लोराइड के मिश्रण, जैसे
MgCl₂-BaCl₂-CaF₂) के साथ उपचारित किया जा सकता है। ये फ्लक्स गैर-धातु समावेशन और कुछ धात्विक अशुद्धियों को हटाकर ड्रॉस (धातु मल) बनाने में मदद करते हैं, जो पिघले हुए मैग्नीशियम से अलग हो जाता है। यह अक्सर आगे के शोधन से पहले एक प्रारंभिक कदम होता है। - पुनर्चक्रण: मैग्नीशियम धातु का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्क्रैप के पुनर्चक्रण के माध्यम से प्राप्त किया जाता है, जिसमें फ्लक्स शोधन और आसवन के समान पिघलने और शुद्धिकरण प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।