नाइट्रोजन (N) का रसायन विज्ञान: अभ्यास प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. निम्नलिखित में से कौन सा कथन कमरे के तापमान पर डाइनाइट्रोजन (N) की निष्क्रियता को सबसे अच्छी तरह समझाता है?
A) नाइट्रोजन का परमाणु आकार छोटा होता है। B) नाइट्रोजन की विद्युत ऋणात्मकता अधिक होती है। C) N में N≡N बंधन की बंधन वियोजन एन्थैल्पी बहुत अधिक होती है। D) नाइट्रोजन एक अधातु है।
उत्तर: C व्याख्या: डाइनाइट्रोजन (N) में एक त्रिक बंधन (N≡N) होता है, जो बहुत मजबूत होता है। N≡N बंधन के लिए बंधन वियोजन एन्थैल्पी लगभग 946 kJ/mol है, जो एक द्विपरमाणुक अणु के लिए ज्ञात उच्चतम एन्थैल्पी में से एक है। बंधन को तोड़ने के लिए आवश्यक यह उच्च ऊर्जा N को कमरे के तापमान पर रासायनिक रूप से निष्क्रिय और अप्रतिक्रियाशील बनाती है।
2. अमोनियम नाइट्रेट (NHNO) में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
A) +5 और -3 B) +3 और -5 C) +1 और -1 D) +4 और -4
उत्तर: A व्याख्या: अमोनियम नाइट्रेट एक आयनिक यौगिक है जो अमोनियम आयन (NH_4$$^+) और नाइट्रेट आयन (NO_3$$^-) से बना है। NH_4$$^+ में: मान लीजिए N की ऑक्सीकरण अवस्था ‘x’ है। x + 4(+1) = +1 => x + 4 = +1 => x = -3। NO_3$$^- में: मान लीजिए N की ऑक्सीकरण अवस्था ‘y’ है। y + 3(-2) = -1 => y - 6 = -1 => y = +5। इसलिए, अमोनियम नाइट्रेट में नाइट्रोजन दो अलग-अलग ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करता है: अमोनियम आयन में -3 और नाइट्रेट आयन में +5।
3. अमोनिया के निर्माण के लिए हैबर विधि के लिए सही परिस्थितियों का समूह निम्नलिखित में से कौन सा है?
A) उच्च तापमान, निम्न दाब, उत्प्रेरक की उपस्थिति। B) निम्न तापमान, उच्च दाब, उत्प्रेरक की अनुपस्थिति। C) उच्च तापमान, उच्च दाब, उत्प्रेरक की उपस्थिति। D) निम्न तापमान, निम्न दाब, उत्प्रेरक की उपस्थिति।
उत्तर: C व्याख्या: हैबर विधि (N(g) + 3H(g) ⇌ 2NH(g), ΔH = -92.4 kJ/mol) एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है जिससे मोलों की संख्या में कमी आती है। ले-शातेलियर के सिद्धांत के अनुसार:
- तापमान: चूंकि अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है, इसलिए कम तापमान अमोनिया के निर्माण के पक्ष में होता है। हालांकि, आर्थिक रूप से व्यवहार्य अभिक्रिया दर प्राप्त करने के लिए, 673-773 K (400-500 °C) का एक समझौता तापमान उपयोग किया जाता है।
- दाब: अभिक्रिया में मोलों की संख्या में कमी शामिल है (अभिकारकों के 4 मोल से उत्पाद के 2 मोल)। इसलिए, उच्च दाब अमोनिया के निर्माण के पक्ष में होता है। आमतौर पर, 200-300 atm का दाब उपयोग किया जाता है।
- उत्प्रेरक: अभिक्रिया की दर बढ़ाने के लिए एक लौह उत्प्रेरक (अक्सर मोलिब्डेनम को प्रमोटर के रूप में) का उपयोग किया जाता है, जिससे संतुलन की स्थिति को प्रभावित किए बिना संतुलन तेजी से प्राप्त करने में मदद मिलती है।
इस प्रकार, सही परिस्थितियों का समूह उच्च तापमान (गतिज अनुकूलता के सापेक्ष), उच्च दाब और एक उत्प्रेरक की उपस्थिति है।
अभिकथन-कारण प्रश्न
निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों में, अभिकथन (A) का एक कथन दिया गया है जिसके बाद कारण (R) का एक कथन दिया गया है। सही विकल्प चुनें। A) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। B) A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है। C) A सत्य है, लेकिन R असत्य है। D) A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
1. अभिकथन (A): डाइनाइट्रोजन (N) सफेद फास्फोरस (P) की तुलना में कम प्रतिक्रियाशील है।
कारण (R): नाइट्रोजन में एक मजबूत N≡N बंधन होता है और फास्फोरस के विपरीत, बंधन विस्तार के लिए d-कक्षक की कमी होती है।
उत्तर: A व्याख्या:
- अभिकथन (A): डाइनाइट्रोजन वास्तव में सफेद फास्फोरस की तुलना में कम प्रतिक्रियाशील है। N कमरे के तापमान पर काफी निष्क्रिय है, जबकि सफेद फास्फोरस अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होता है और हवा में स्वतः प्रज्वलित हो जाता है।
- कारण (R): डाइनाइट्रोजन में N≡N त्रिक बंधन की बंधन वियोजन एन्थैल्पी असाधारण रूप से उच्च (946 kJ/mol) होती है, जिससे इसे तोड़ना मुश्किल हो जाता है। यही इसकी निष्क्रियता का प्राथमिक कारण है। इसके अतिरिक्त, नाइट्रोजन के संयोजी कोश में सुलभ d-कक्षक नहीं होते हैं, जो इसे अपने अष्टक का विस्तार करने और चार से अधिक बंधन बनाने से रोकता है। दूसरी ओर, फास्फोरस में रिक्त d-कक्षक होते हैं, जिससे यह चार से अधिक बंधन (जैसे PCl) बना सकता है और विभिन्न प्रकार की अभिक्रियाओं में भाग ले सकता है। P में P-P एकल बंधन भी N≡N त्रिक बंधन की तुलना में कमजोर होता है। A और R दोनों सत्य हैं, और R सही ढंग से बताता है कि N कम प्रतिक्रियाशील क्यों है।
2. अभिकथन (A): सांद्र नाइट्रिक अम्ल एक प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
कारण (R): सांद्र नाइट्रिक अम्ल में, नाइट्रोजन अपनी उच्चतम संभव ऑक्सीकरण अवस्था +5 में होता है।
उत्तर: A व्याख्या:
- अभिकथन (A): सांद्र नाइट्रिक अम्ल (HNO) एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है, जो कई धातुओं (Au, Pt जैसे उत्कृष्ट धातुओं को छोड़कर) और अधातुओं को ऑक्सीकृत करने में सक्षम है।
- कारण (R): HNO में, नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना इस प्रकार की जाती है: x + 1(+1) + 3(-2) = 0 => x - 5 = 0 => x = +5। यह नाइट्रोजन के लिए उच्चतम संभव ऑक्सीकरण अवस्था है। चूंकि नाइट्रोजन पहले से ही अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था में है, यह केवल अपनी ऑक्सीकरण अवस्था को कम कर सकता है, जिसका अर्थ है कि यह केवल अपचयित हो सकता है। वे प्रजातियाँ जो अपचयित होती हैं, ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करती हैं। A और R दोनों सत्य हैं, और R, A के लिए सही व्याख्या प्रदान करता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. समझाइए कि अमोनिया (NH) लुईस क्षार के रूप में क्यों कार्य करता है।
आदर्श उत्तर: अमोनिया (NH) नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण एक लुईस क्षार के रूप में कार्य करता है। लुईस सिद्धांत के अनुसार, एक लुईस क्षार एक ऐसी प्रजाति है जो इलेक्ट्रॉनों का एक युग्म दान कर सकती है। अमोनिया में नाइट्रोजन परमाणु के पास पांच संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं; तीन हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंधन बनाने के लिए साझा किए जाते हैं, जिससे एक एकाकी युग्म बचता है। यह आसानी से उपलब्ध एकाकी युग्म एक इलेक्ट्रॉन-न्यून प्रजाति (एक लुईस अम्ल) को दान किया जा सकता है, जिससे एक उपसहसंयोजक बंधन बनता है। उदाहरण के लिए: NH + H → NH_4$$^+ (अमोनिया अपना एकाकी युग्म H को दान करता है) NH + BF → HN → BF (अमोनिया अपना एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन-न्यून BF को दान करता है)
2. नाइट्रिक अम्ल के निर्माण के लिए ओस्टवाल्ड प्रक्रिया में शामिल मुख्य चरणों का वर्णन कीजिए।
आदर्श उत्तर: ओस्टवाल्ड प्रक्रिया अमोनिया (NH) से नाइट्रिक अम्ल (HNO) के निर्माण की एक औद्योगिक विधि है। इसमें तीन मुख्य चरण शामिल हैं:
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अमोनिया का उत्प्रेरक ऑक्सीकरण: अमोनिया गैस को हवा (या ऑक्सीजन) के साथ मिलाकर एक गर्म प्लैटिनम-रोडियम जालीदार उत्प्रेरक के ऊपर से लगभग 800-950 °C और 9 बार दाब पर गुजारा जाता है। अमोनिया नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) और जल में ऑक्सीकृत हो जाता है। 4NH(g) + 5O(g) 4NO(g) + 6HO(g)
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नाइट्रिक ऑक्साइड का ऑक्सीकरण: उत्पन्न नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) को ठंडा किया जाता है और फिर अतिरिक्त हवा (या ऑक्सीजन) के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO) बनाने के लिए आगे ऑक्सीकृत किया जाता है। यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है और स्वतः होती है। 2NO(g) + O(g) 2NO(g)
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नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का जल में अवशोषण: नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO) को फिर एक अवशोषण टावर में जल में अवशोषित किया जाता है, आमतौर पर जल प्रवाह के प्रति-धारा में। यह अभिक्रिया नाइट्रिक अम्ल का उत्पादन करती है और कुछ नाइट्रिक ऑक्साइड को पुनर्जीवित करती है। नाइट्रिक ऑक्साइड को फिर चरण 2 में वापस पुनर्चक्रित किया जाता है। 3NO(g) + HO(l) 2HNO(aq) + NO(g) प्राप्त जलीय नाइट्रिक अम्ल आमतौर पर द्रव्यमान के अनुसार लगभग 68% होता है।
उच्च-स्तरीय सोच कौशल (HOTS) प्रश्न
समझाइए कि समूह 15 के हाइड्राइडों (NH, PH, AsH, SbH, BiH) में BiH सबसे प्रबल अपचायक क्यों है, जबकि NH सबसे दुर्बल है।
आदर्श उत्तर: समूह 15 के हाइड्राइडों (MH) का अपचायक गुण NH से BiH तक समूह में नीचे जाने पर बढ़ता है। इस प्रवृत्ति को M-H बंधन की बंधन शक्ति और केंद्रीय परमाणु के आकार पर विचार करके समझाया गया है।
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बंधन वियोजन एन्थैल्पी (M-H बंधन शक्ति): जैसे-जैसे हम समूह 15 में नाइट्रोजन से बिस्मथ की ओर नीचे जाते हैं, केंद्रीय परमाणु (M) का परमाणु आकार काफी बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप, M-H बंधन की लंबाई बढ़ जाती है (उदाहरण के लिए, N-H बंधन Bi-H बंधन से छोटा होता है)। एक लंबा बंधन आमतौर पर एक कमजोर बंधन का अर्थ होता है, क्योंकि केंद्रीय परमाणु और हाइड्रोजन के संयोजी कक्षकों के बीच अतिव्यापन कम प्रभावी हो जाता है। इसलिए, M-H बंधन की बंधन वियोजन एन्थैल्पी NH से BiH तक उत्तरोत्तर घटती जाती है।
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हाइड्रोजन मुक्त करने की सुगमता: अपचायक ऐसे पदार्थ होते हैं जो इलेक्ट्रॉनों का दान करते हैं या अपचयन के लिए हाइड्रोजन परमाणु प्रदान करते हैं (स्वयं ऑक्सीकृत हो जाते हैं)। हाइड्राइडों के मामले में, उनकी अपचायक शक्ति उस सुगमता से संबंधित है जिससे वे हाइड्रोजन परमाणुओं को मुक्त कर सकते हैं। चूंकि समूह में नीचे जाने पर M-H बंधन की शक्ति कम हो जाती है, इसलिए M-H बंधन को तोड़ना और हाइड्रोजन को मुक्त करना उत्तरोत्तर आसान हो जाता है।
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हाइड्राइडों का स्थायित्व: इन हाइड्राइडों का तापीय स्थायित्व भी इसी प्रवृत्ति का अनुसरण करता है, NH से BiH तक घटता जाता है। NH बहुत स्थिर है, जबकि BiH अत्यधिक अस्थिर है और गर्म करने पर आसानी से बिस्मथ और हाइड्रोजन में विघटित हो जाता है।
निष्कर्ष:
- NH (अमोनिया): नाइट्रोजन के छोटे आकार और प्रभावी कक्षीय अतिव्यापन के कारण इसमें सबसे मजबूत N-H बंधन होता है। इससे हाइड्रोजन को मुक्त करना मुश्किल हो जाता है, इसलिए यह सबसे दुर्बल अपचायक (या सबसे स्थिर) है।
- BiH (बिस्मथीन): बिस्मथ के बड़े आकार और खराब कक्षीय अतिव्यापन के कारण इसमें सबसे कमजोर Bi-H बंधन होता है। इससे हाइड्रोजन को मुक्त करना बहुत आसान हो जाता है, जिससे यह सबसे प्रबल अपचायक (या सबसे कम स्थिर) बन जाता है।
अपचायक शक्ति का क्रम है: NH < PH < AsH < SbH < BiH।