फॉस्फोरस: अभ्यास प्रश्न (JEE/NEET और CBSE)
फॉस्फोरस: अभ्यास प्रश्न सेट
यह खंड फॉस्फोरस (P) के रसायन विज्ञान पर अभ्यास प्रश्नों का एक संरचित सेट प्रदान करता है, जिसे JEE/NEET और CBSE छात्रों के लिए प्रमुख अवधारणाओं को सुदृढ़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
Q1. सफेद फॉस्फोरस के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है? A. यह एक नरम, मोमी ठोस है। B. यह कार्बन डाइसल्फाइड (CS₂) में घुलनशील है। C. यह अंधेरे में चमकता है (रसायन संदीप्ति)। D. यह लाल फॉस्फोरस की तुलना में कम अभिक्रियाशील है।
हल: सही उत्तर: D स्पष्टीकरण: सफेद फॉस्फोरस गतिज रूप से फॉस्फोरस का सबसे अधिक अभिक्रियाशील अपररूप है, क्योंकि इसमें अत्यधिक तनावग्रस्त चतुष्फलकीय P₄ अणु (बंध कोण 60°) होता है, जिससे वलय आसानी से खुल जाता है और उच्च अभिक्रियाशीलता होती है। लाल फॉस्फोरस बहुलक होता है और बहुत कम अभिक्रियाशील होता है।
Q2. ऑर्थोफॉस्फोरस अम्ल (H₃PO₃) की क्षारकता है: A. 1 B. 2 C. 3 D. 4
हल: सही उत्तर: B स्पष्टीकरण: किसी ऑक्सीअम्ल की क्षारकता आयनीकृत होने योग्य P-OH बंधों की संख्या से निर्धारित होती है। ऑर्थोफॉस्फोरस अम्ल (H₃PO₃) में, दो P-OH बंध और एक P-H बंध होते हैं। केवल ऑक्सीजन से जुड़े हाइड्रोजन परमाणु ही आयनीकृत हो सकते हैं। इसलिए, H₃PO₃ एक द्विभास्मिक अम्ल है। इसकी संरचना O=P(OH)₂H है।
Q3. जब P₄O₁₀ को ठंडे पानी में घोला जाता है, तो बनने वाला प्रमुख उत्पाद है: A. फॉस्फिनिक अम्ल (H₃PO₂) B. फॉस्फोनिक अम्ल (H₃PO₃) C. पायरोफॉस्फोरिक अम्ल (H₄P₂O₇) D. ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल (H₃PO₄)
हल: सही उत्तर: D स्पष्टीकरण: फॉस्फोरस पेंटाऑक्साइड (P₄O₁₀) ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल (H₃PO₄) का एनहाइड्राइड है। जब P₄O₁₀ ठंडे पानी के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल बनाता है। P₄O₁₀ + 6H₂O → 4H₃PO₄ P₄O₁₀ एक प्रबल निर्जलीकरण कारक भी है।
अभिकथन-कारण प्रश्न
निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों में, अभिकथन (A) का एक कथन दिया गया है जिसके बाद कारण (R) का एक कथन दिया गया है। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनें। A. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। B. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है। C. A सत्य है, लेकिन R असत्य है। D. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
Q4. अभिकथन (A): फॉस्फिन (PH₃) अमोनिया (NH₃) की तुलना में एक दुर्बल क्षार है। कारण (R): PH₃ में फॉस्फोरस पर इलेक्ट्रॉनों का एकाकी युग्म, NH₃ में नाइट्रोजन पर एकाकी युग्म की तुलना में दान के लिए कम उपलब्ध होता है, क्योंकि N की तुलना में P का परमाणु आकार बड़ा और विद्युतऋणात्मकता कम होती है।
हल: सही उत्तर: A स्पष्टीकरण:
- अभिकथन A सत्य है: PH₃ वास्तव में NH₃ की तुलना में एक दुर्बल क्षार है।
- कारण R सत्य है: नाइट्रोजन फॉस्फोरस से छोटा और अधिक विद्युतऋणात्मक होता है। इसका मतलब है कि नाइट्रोजन पर एकाकी युग्म एक छोटे, अधिक केंद्रित कक्षक में होता है, जिससे यह दान के लिए अधिक आसानी से उपलब्ध होता है और प्रोटॉन के साथ अधिक मजबूत बंध बनाता है। फॉस्फोरस में, एकाकी युग्म एक बड़े, अधिक विसरित कक्षक में होता है, जिससे यह दान के लिए कम उपलब्ध होता है और इसके परिणामस्वरूप एक दुर्बल क्षार बनता है।
- R, A की सही व्याख्या है: कारण में उल्लिखित कारक सीधे बताते हैं कि PH₃ एक दुर्बल क्षार क्यों है।
Q5. अभिकथन (A): लाल फॉस्फोरस बहुलक प्रकृति का होता है। कारण (R): लाल फॉस्फोरस सफेद फॉस्फोरस में P-P बंधों को तोड़ने और एक बहुलक संरचना बनाने के लिए नए P-P बंधों के निर्माण से बनता है।
हल: सही उत्तर: A स्पष्टीकरण:
- अभिकथन A सत्य है: लाल फॉस्फोरस एक बहुलक नेटवर्क संरचना के रूप में मौजूद होता है, जिसमें P₄ चतुष्फलकीय इकाइयों की श्रृंखलाएँ या नेटवर्क एक साथ जुड़े होते हैं।
- कारण R सत्य है: लाल फॉस्फोरस को सफेद फॉस्फोरस को 573 K पर एक निष्क्रिय वातावरण में गर्म करके या सूर्य के प्रकाश के संपर्क में लाने से प्राप्त किया जाता है। इस प्रक्रिया में सफेद फॉस्फोरस के व्यक्तिगत P₄ चतुष्फलकों में कुछ P-P बंधों का टूटना और नए P-P बंधों का निर्माण शामिल है, जो इन इकाइयों को एक बहुलक संरचना में जोड़ते हैं।
- R, A की सही व्याख्या है: कारण में वर्णित क्रियाविधि सीधे लाल फॉस्फोरस की बहुलक प्रकृति की ओर ले जाती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Q6. गैसीय अवस्था में PCl₃ और PCl₅ की संरचनाएँ बनाएँ, और उनके संकरण और ज्यामिति पर टिप्पणी करें।
मॉडल उत्तर:
फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड (PCl₃):
- संरचना: पिरामिडीय
- संकरण: sp³
- ज्यामिति: फॉस्फोरस के चारों ओर चतुष्फलकीय इलेक्ट्रॉन युग्म ज्यामिति, लेकिन एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण त्रिकोणीय पिरामिडीय आणविक ज्यामिति।
- बंध कोण: लगभग 100° (एकाकी युग्म-बंध युग्म प्रतिकर्षण के कारण 109.5° से कम)।
graph TD
P -- Cl
P -- Cl
P -- Cl
style P fill:#f9f,stroke:#333,stroke-width:2px
style Cl fill:#c3f,stroke:#333,stroke-width:2px
subgraph PCl3
direction LR
P --- Cl1
P --- Cl2
P --- Cl3
P -- L(Lone Pair)
end
(केंद्रीय P, तीन Cl परमाणुओं और P पर एक एकाकी युग्म के साथ एक पिरामिडीय संरचना का प्रतिनिधित्व)
फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड (PCl₅):
- संरचना (गैसीय अवस्था): त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय
- संकरण: sp³d
- ज्यामिति: त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय। तीन क्लोरीन परमाणु भूमध्यरेखीय स्थिति पर कब्जा करते हैं, और दो क्लोरीन परमाणु अक्षीय स्थिति पर कब्जा करते हैं।
- बंध कोण: 120° (भूमध्यरेखीय-भूमध्यरेखीय) और 90° (अक्षीय-भूमध्यरेखीय)। अक्षीय बंध भूमध्यरेखीय बंधों की तुलना में थोड़े लंबे और कमजोर होते हैं, जो अधिक प्रतिकर्षण अंतःक्रियाओं के कारण होते हैं।
graph TD
P -- Cl(axial)
P -- Cl(axial)
P -- Cl(equatorial)
P -- Cl(equatorial)
P -- Cl(equatorial)
style P fill:#f9f,stroke:#333,stroke-width:2px
style Cl fill:#c3f,stroke:#333,stroke-width:2px
subgraph PCl5
direction LR
Cl_ax1 --- P --- Cl_ax2
P --- Cl_eq1
P --- Cl_eq2
P --- Cl_eq3
end
(केंद्रीय P, दो अक्षीय Cl, और तीन भूमध्यरेखीय Cl परमाणुओं के साथ एक त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय संरचना का प्रतिनिधित्व)
Q7. फॉस्फिनिक अम्ल (H₃PO₂) एक अपचायक कारक के रूप में कार्य करता है, जबकि फॉस्फोरिक अम्ल (H₃PO₄) नहीं करता है। उनकी संरचनाओं के आधार पर इस अंतर को समझाएँ।
मॉडल उत्तर:
फॉस्फोरस ऑक्सीअम्लों की अपचायक प्रकृति P-H बंधों की उपस्थिति के कारण होती है। ये P-H बंध अम्लीय नहीं होते हैं, लेकिन वे अपचायक गुणों के लिए जिम्मेदार होते हैं क्योंकि फॉस्फोरस से सीधे जुड़ा हाइड्रोजन परमाणु ऑक्सीकृत हो सकता है।
-
फॉस्फिनिक अम्ल (H₃PO₂):
- संरचना: O=P(OH)H₂
- इसमें दो P-H बंध और एक P-OH बंध होता है।
- दो P-H बंधों की उपस्थिति इसे एक प्रबल अपचायक कारक बनाती है। H₃PO₂ में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्था +1 है, जिसे आसानी से उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाओं (जैसे H₃PO₃ में +3 या H₃PO₄ में +5) में ऑक्सीकृत किया जा सकता है।
- उदाहरण अभिक्रिया: 4AgNO₃ + H₃PO₂ + 2H₂O → 4Ag + H₃PO₄ + 4HNO₃
-
फॉस्फोरिक अम्ल (H₃PO₄):
- संरचना: O=P(OH)₃
- इसमें तीन P-OH बंध होते हैं, लेकिन कोई P-H बंध नहीं होता है।
- चूंकि कोई P-H बंध नहीं होता है, यह अपचायक गुण प्रदर्शित नहीं करता है। H₃PO₄ में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्था +5 है, जो इसकी अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था है, जिसका अर्थ है कि इसे और अधिक ऑक्सीकृत नहीं किया जा सकता है।
उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल (HOTS) प्रश्न
Q8. जब PCl₅ को गर्म किया जाता है, तो यह कम तापमान पर उर्ध्वपातित हो जाता है, लेकिन अधिक गर्म करने पर, यह PCl₃ और Cl₂ में वियोजित हो जाता है। ठोस PCl₅ और गैसीय PCl₅ में बंधों को समझाएँ, और यह इसके वियोजन व्यवहार से कैसे संबंधित है।
विस्तृत रासायनिक स्पष्टीकरण:
1. गैसीय PCl₅:
- गैसीय अवस्था में, PCl₅ असतत त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय अणुओं के रूप में मौजूद होता है।
- संकरण: केंद्रीय फॉस्फोरस परमाणु sp³d संकरित होता है।
- ज्यामिति: इसमें पाँच P-Cl बंधों के साथ एक त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय ज्यामिति होती है।
- बंध लंबाई: सभी P-Cl बंध समतुल्य नहीं होते हैं। तीन भूमध्यरेखीय P-Cl बंध (120° पर, छोटे और मजबूत) और दो अक्षीय P-Cl बंध (भूमध्यरेखीय से 90° पर, लंबे और कमजोर) होते हैं। यह अंतर अधिक एकाकी युग्म-बंध युग्म प्रतिकर्षण (या आदर्श sp³d संकरण व्याख्या के मामले में बंध युग्म-बंध युग्म प्रतिकर्षण) और