All Rhenium (Re) Guides
Revision Guide Class 10-12 / JEE / NEET

रेनियम (Re): गुणधर्म, अभिक्रियाएँ और अनुप्रयोग

By Periodic Table India
CBSE / JEE Prep Notes
- Chemistry - Inorganic Chemistry - Rhenium - Transition Metals - JEE - NEET - CBSE

परिचय

रेनियम (Re) एक दुर्लभ, सघन, चांदी-सफेद संक्रमण धातु है जो अपने अत्यधिक उच्च गलनांक के लिए उल्लेखनीय है—यह सभी तत्वों में तीसरा सबसे अधिक गलनांक वाला तत्व है, जो केवल टंगस्टन और कार्बन (ऊर्ध्वपातन बिंदु) से कम है। उच्च तापमान स्थिरता, घनत्व और संक्षारण प्रतिरोध के इसके अद्वितीय संयोजन इसे उच्च-प्रदर्शन अनुप्रयोगों, विशेष रूप से एयरोस्पेस और पेट्रोलियम उद्योगों में अपरिहार्य बनाते हैं। इसकी दुर्लभता और इसके निष्कर्षण की कठिनाई इसकी उच्च लागत में योगदान करती है।

सीबीएसई/जेईई त्वरित पुनरीक्षण नोट्स

  • परमाणु संख्या: 75
  • परमाणु द्रव्यमान: 186.207 g/mol
  • प्रतीक: Re
  • समूह: 7 (VIIB)
  • आवर्त: 6
  • ब्लॉक: d-ब्लॉक
  • तत्व प्रकार: संक्रमण धातु
  • सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: +7, +6, +5, +4, +3, +2, +1, -1 (सबसे स्थिर/सामान्य: +7, +4)
  • प्रकृति: चांदी-सफेद, चमकदार, सघन, दुर्दम्य धातु।
  • गलनांक: 3186 °C (असाधारण रूप से उच्च)
  • क्वथनांक: 5596 °C
  • घनत्व: 21.02 g/cm³ (सबसे सघन तत्वों में से एक)
  • खोज: 1925 में वाल्टर नोडैक, इडा टैके और ओटो बर्ग द्वारा खोजा गया।

इलेक्ट्रॉन विन्यास और आबंध व्यवहार

इलेक्ट्रॉन विन्यास

रेनियम का मूल अवस्था इलेक्ट्रॉन विन्यास है: [Xe] 4f¹⁴ 5d⁵ 6s²

आबंध व्यवहार

  • रेनियम संक्रमण धातुओं की विशिष्टता के अनुसार -1 से +7 तक ऑक्सीकरण अवस्थाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित करता है।
  • +7 ऑक्सीकरण अवस्था सबसे सामान्य और स्थिर है, जिसका उदाहरण पररेनिएट्स (ReO₄⁻) और रेनियम(VII) ऑक्साइड (Re₂O₇) जैसे यौगिक हैं। यह अवस्था दो 6s इलेक्ट्रॉनों और पाँच 5d इलेक्ट्रॉनों के नुकसान से उत्पन्न होती है।
  • निचली ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, विशेष रूप से +4 और +6, भी महत्वपूर्ण हैं और विभिन्न यौगिकों में पाई जाती हैं, जिनमें अक्सर मजबूत धातु-धातु आबंध होता है।
  • रेनियम लिगेंड के साथ स्थिर संकुल बनाता है, जो इसकी विशिष्ट संक्रमण धातु उपसहसंयोजन रसायन को दर्शाता है।

महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ

रेनियम कमरे के तापमान पर आमतौर पर अक्रियाशील होता है लेकिन गर्म करने पर या प्रबल ऑक्सीकारक अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया करता है।

1. ऑक्सीजन (वायु) के साथ अभिक्रिया

रेनियम गर्म करने पर ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके रेनियम(VII) ऑक्साइड बनाता है, जो एक वाष्पशील पीला ठोस है। 4 Re (s) + 7 O₂ (g) \rightarrow 2 Re₂O₇ (s)

2. हैलोजन के साथ अभिक्रिया

रेनियम हैलोजन, विशेष रूप से फ्लोरीन और क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके हैलाइड बनाता है, अक्सर उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाओं में।

  • फ्लोरीन के साथ: रेनियम(VII) फ्लोराइड बनाता है। 2 Re (s) + 7 F₂ (g) \rightarrow 2 ReF₇ (s)
  • क्लोरिन के साथ: रेनियम(V) क्लोराइड बनाता है। 2 Re (s) + 5 Cl₂ (g) \rightarrow 2 ReCl₅ (s)

3. अम्लों के साथ अभिक्रिया

  • अन-ऑक्सीकारक अम्लों के साथ (उदा. HCl): रेनियम अपने उत्कृष्ट प्रकृति के कारण आमतौर पर अन-ऑक्सीकारक अम्लों के साथ अक्रियाशील होता है।
  • ऑक्सीकारक अम्लों के साथ (उदा. HNO₃, H₂SO₄): रेनियम गर्म, सांद्र ऑक्सीकारक अम्लों के साथ अभिक्रिया करके पररेनिक अम्ल या पररेनिएट आयन बनाता है। 3 Re (s) + 7 HNO₃ (conc) \rightarrow 3 HReO₄ (aq) + 7 NO (g) + 2 H₂O (l) नोट: पररेनिक अम्ल, HReO₄, एक प्रबल अम्ल है और विलयन में ReO₄⁻ के रूप में मौजूद होता है।

4. पररेनिएट्स का निर्माण

रेनियम(VII) ऑक्साइड पानी में घुल कर पररेनिक अम्ल बनाता है। Re₂O₇ (s) + H₂O (l) \rightarrow 2 HReO₄ (aq) पररेनिक अम्ल फिर क्षारकों के साथ अभिक्रिया करके पररेनिएट लवण बनाता है (उदा. पोटेशियम पररेनिएट)। HReO₄ (aq) + KOH (aq) \rightarrow KReO₄ (aq) + H₂O (l)

औद्योगिक और जैविक महत्व

औद्योगिक महत्व

  • सुपरमिश्रधातुएँ: रेनियम का उपयोग मुख्य रूप से उच्च-तापमान सुपरमिश्रधातुओं में किया जाता है, विशेष रूप से जेट इंजन घटकों (उदा. टर्बाइन ब्लेड) के लिए निकल-आधारित मिश्रधातुओं में। यह रेंगने की शक्ति (creep strength) और उच्च-तापमान प्रदर्शन में काफी सुधार करता है।
  • उत्प्रेरक: पेट्रोलियम उद्योग में उत्प्रेरकीय सुधार (catalytic reforming) के लिए रेनियम-प्लेटिनम उत्प्रेरक महत्वपूर्ण हैं, जो कम-ऑक्टेन वाले नेफ्था को उच्च-ऑक्टेन वाले गैसोलीन घटकों (उदा. एरोमेटिक्स) में परिवर्तित करते हैं।
  • विद्युत संपर्क और फिलामेंट्स: इसका उच्च गलनांक और आर्क के प्रति प्रतिरोध इसे द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमीटर, निर्वात ट्यूब और आयन गेज में विद्युत संपर्कों और फिलामेंट्स के लिए उपयुक्त बनाता है।
  • थर्मोकपल: रेनियम-टंगस्टन मिश्रधातुओं (उदा. W-Re मिश्रधातु) का उपयोग अत्यधिक उच्च तापमान को मापने के लिए थर्मोकपल में किया जाता है।
  • एक्स-रे ट्यूब: रेनियम का उपयोग कभी-कभी एक्स-रे लक्ष्यों में एक मिश्रधातु तत्व के रूप में किया जाता है।

जैविक महत्व

  • गैर-आवश्यक तत्व: रेनियम की मनुष्यों, जानवरों या पौधों में कोई ज्ञात जैविक भूमिका नहीं है। इसे एक आवश्यक सूक्ष्म तत्व नहीं माना जाता है।
  • कम विषाक्तता: जबकि इसके यौगिकों को आमतौर पर कम विषाक्तता वाला माना जाता है, कुछ रेनियम यौगिकों के उच्च संपर्क स्तर संभावित रूप से हानिकारक हो सकते हैं। हालांकि, इसकी दुर्लभता और सीमित अनुप्रयोगों का अर्थ है कि पर्यावरणीय या जैविक संपर्क न्यूनतम है।
  • रेडियोफार्मास्युटिकल्स: रेनियम के कुछ रेडियोधर्मी समस्थानिक, जैसे रेनियम-186 और रेनियम-188, कैंसर के इलाज के लिए लक्षित रेडियोथेरेपी में उनकी उपयुक्त अर्ध-आयु और उत्सर्जन विशेषताओं के कारण उनकी क्षमता के लिए जांच किए जा रहे हैं। यह एक चिकित्सा अनुप्रयोग है, न कि एक प्राकृतिक जैविक भूमिका।