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समेरियम (Sm) - JEE/NEET/CBSE के लिए व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका

By Periodic Table India
CBSE / JEE Prep Notes
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परिचय: समेरियम (Sm) का महत्व

समेरियम (Sm) एक चांदी जैसा सफेद, मध्यम कठोर धातु है जो लैंथेनाइड श्रृंखला, या f-ब्लॉक तत्वों से संबंधित है, जिसका परमाणु क्रमांक 62 है। हालाँकि अन्य तत्वों की तुलना में इस पर कम चर्चा होती है, समेरियम उच्च-प्रदर्शन स्थायी चुम्बकों, परमाणु रिएक्टर नियंत्रण और उन्नत चिकित्सा उपचारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी अद्वितीय इलेक्ट्रॉनिक संरचना और परिणामस्वरूप रासायनिक व्यवहार इसे अकार्बनिक रसायन विज्ञान के अध्ययनों में एक विशिष्ट तत्व बनाता है।

CBSE/JEE त्वरित पुनरीक्षण नोट्स

यहाँ समेरियम के बारे में आवश्यक तथ्य दिए गए हैं जो परीक्षाओं के दौरान त्वरित स्मरण के लिए उपयोगी हैं:

  • प्रतीक: Sm
  • परमाणु क्रमांक (Z): 62
  • परमाणु द्रव्यमान: 150.36 g/mol
  • इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Xe] 4f⁶ 6s²
  • आवर्त: 6
  • समूह: लैंथेनाइड श्रृंखला (f-ब्लॉक तत्व, आमतौर पर समूह 3 के भीतर माना जाता है)
  • ब्लॉक: f-ब्लॉक
  • सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: +3 (सबसे स्थिर और प्रचलित), +2 (कम सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण)
  • प्रकृति: नरम, चांदी जैसा सफेद धातु, अत्यधिक विद्युत धनात्मक।

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और बंधन व्यवहार

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

समेरियम का मूल अवस्था इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Xe] 4f⁶ 6s² है।

  • ज़ेनॉन कोर ([Xe]) परमाणु क्रमांक 54 तक भरे हुए कक्षकों को दर्शाता है।
  • कम ऊर्जा के कारण 4f कक्षकों से पहले 6s कक्षक भरे जाते हैं।
  • 4f कक्षकों में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

ऑक्सीकरण अवस्थाएँ और बंधन

  1. +3 ऑक्सीकरण अवस्था: यह समेरियम के लिए सबसे स्थिर और सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था है, जो सभी लैंथेनाइड्स की विशेषता है। यह दो 6s इलेक्ट्रॉनों और एक 4f इलेक्ट्रॉन के नुकसान से उत्पन्न होती है, जिससे Sm₂O₃, SmCl₃ जैसे यौगिक बनते हैं।
  2. +2 ऑक्सीकरण अवस्था: समेरियम एक स्थिर +2 ऑक्सीकरण अवस्था (उदाहरण के लिए, SmCl₂) प्रदर्शित करता है जो लैंथेनाइड्स के बीच कम सामान्य है। यह अवस्था अक्सर अर्ध-भरी हुई 4f⁷ विन्यास प्राप्त करने की प्रवृत्ति (हालांकि Sm²⁺ 4f⁶ है) या एक स्थिर 4f⁵d¹ विन्यास, या विशेष रूप से बड़े आयनों के साथ अपेक्षाकृत स्थिर Sm²⁺ यौगिक बनाने की Sm की क्षमता के कारण होती है। Sm²⁺ यौगिक आमतौर पर शक्तिशाली अपचायक होते हैं।

बंधन विशेषताएँ

समेरियम मुख्य रूप से अपने यौगिकों में आयनिक बंध बनाता है, विशेष रूप से +3 ऑक्सीकरण अवस्था में, जो इसकी अत्यधिक विद्युत धनात्मक प्रकृति को दर्शाता है। सहसंयोजक गुण न्यूनतम होता है।

महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ

समेरियम एक अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु है, खासकर जब इसे गर्म किया जाता है।

  1. वायु/ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया: समेरियम हवा में आसानी से धूमिल हो जाता है और जलकर समेरियम(III) ऑक्साइड बनाता है।

    4Sm(s) + 3O₂(g) → 2Sm₂O₃(s)
    
  2. जल के साथ अभिक्रिया: समेरियम ठंडे पानी के साथ धीरे-धीरे और गर्म पानी के साथ तेजी से अभिक्रिया करके समेरियम(III) हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाता है।

    2Sm(s) + 6H₂O(l) → 2Sm(OH)₃(aq) + 3H₂(g)
    
  3. अम्लों के साथ अभिक्रिया: समेरियम गैर-ऑक्सीकरण अम्लों (जैसे, HCl, H₂SO₄) के साथ तेजी से अभिक्रिया करके समेरियम(III) लवण और हाइड्रोजन गैस बनाता है।

    2Sm(s) + 6HCl(aq) → 2SmCl₃(aq) + 3H₂(g)
    
  4. हैलोजेन के साथ अभिक्रिया: समेरियम हैलोजेन के साथ अभिक्रिया करके ट्राइहैलाइड बनाता है।

    2Sm(s) + 3X₂(g) → 2SmX₃(s)  (जहाँ X = F, Cl, Br, I)
    
  5. SmCl₂ (समेरियम(II) क्लोराइड) का निर्माण: यह SmCl₃ के अपचयन द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

    2SmCl₃(s) + 2Sm(s) → 3SmCl₂(s)
    

    वैकल्पिक रूप से, उच्च तापमान पर हाइड्रोजन के साथ अपचयन द्वारा:

    2SmCl₃(s) + H₂(g) → 2SmCl₂(s) + 2HCl(g)
    

औद्योगिक और जैविक महत्व

औद्योगिक अनुप्रयोग

  • स्थायी चुंबक: समेरियम-कोबाल्ट (SmCo) चुंबक शक्तिशाली स्थायी चुंबक होते हैं जिनमें उच्च चुंबकीय शक्ति, विचुंबकन के प्रति उत्कृष्ट प्रतिरोध और नियोडिमियम चुंबकों की तुलना में बेहतर तापमान स्थिरता होती है। वे उन अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण हैं जहाँ उच्च तापमान पर उच्च प्रदर्शन की आवश्यकता होती है, जैसे एयरोस्पेस, सैन्य प्रौद्योगिकी और उच्च-प्रदर्शन मोटर।
  • परमाणु रिएक्टर: समेरियम-149 (¹⁴⁹Sm) में असाधारण रूप से उच्च न्यूट्रॉन कैप्चर क्रॉस-सेक्शन होता है। यह एक महत्वपूर्ण न्यूट्रॉन अवशोषक है और इसका उपयोग परमाणु रिएक्टर नियंत्रण छड़ों में और श्रृंखला अभिक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए एक परमाणु विष के रूप में किया जाता है।
  • उत्प्रेरण: समेरियम यौगिकों को विभिन्न कार्बनिक अभिक्रियाओं में उत्प्रेरक के रूप में खोजा जा रहा है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स: समेरियम सल्फाइड (SmS) अद्वितीय अर्धचालक गुण प्रदर्शित करता है और इसका उपयोग उच्च तापमान थर्मोइलेक्ट्रिक उपकरणों में किया जा सकता है।
  • लेजर: समेरियम-डॉप्ड कैल्शियम फ्लोराइड क्रिस्टल का उपयोग सॉलिड-स्टेट लेजर में किया जाता है।

जैविक और चिकित्सा महत्व

  • कैंसर थेरेपी: रेडियोधर्मी समस्थानिक समेरियम-153 (¹⁵³Sm) का उपयोग परमाणु चिकित्सा में, मुख्य रूप से समेरियम-153 लेक्सिड्रोनम (क्वाड्रामेट®) के रूप में किया जाता है। यह विभिन्न कैंसर, जिसमें प्रोस्टेट और स्तन कैंसर शामिल हैं, में हड्डी के मेटास्टेसिस से जुड़े दर्द के उपशामक उपचार के लिए एक प्रभावी रेडियोफार्मास्युटिकल है। यह चुनिंदा रूप से हड्डी के ट्यूमर को लक्षित करता है और स्वस्थ ऊतक को होने वाले नुकसान को कम करते हुए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए बीटा विकिरण उत्सर्जित करता है।
  • अनिवार्यता: समेरियम को मानव जीव विज्ञान के लिए एक आवश्यक तत्व के रूप में नहीं जाना जाता है। जैविक प्रणालियों में इसकी उपस्थिति आमतौर पर ट्रेस स्तरों पर होती है।