सल्फर (S) का रसायन विज्ञान - अभ्यास प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्र1: सल्फर के अपररूप
सल्फर का कौन सा अपररूप कमरे के तापमान (25°C) पर स्थिर होता है और S₈ वलय के रूप में मौजूद होता है? (A) एकनताक्ष सल्फर (B) विषमलंबाक्ष सल्फर (C) प्लास्टिक सल्फर (D) कोलॉइडी सल्फर
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: अल्फा-सल्फर, जिसे विषमलंबाक्ष सल्फर भी कहा जाता है, सल्फर का सबसे स्थिर अपररूप है जो 95.6°C (कमरे के तापमान) से कम तापमान पर पाया जाता है। इसमें S₈ मुड़ी हुई वलय संरचनाएं होती हैं, जहाँ प्रत्येक सल्फर परमाणु दो अन्य सल्फर परमाणुओं से बंधा होता है।
प्र2: SO₂ के रेडॉक्स गुण
सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में कार्य कर सकता है। निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया इसके अपचायक प्रकृति का सबसे अच्छा उदाहरण है? (A) SO₂ + 2H₂S → 3S + 2H₂O (B) SO₂ + Cl₂ → SO₂Cl₂ (C) SO₂ + 2NaOH → Na₂SO₃ + H₂O (D) SO₂ + 2Mg → 2MgO + S
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: SO₂ के अपचायक के रूप में कार्य करने के लिए, सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़नी चाहिए।
- अभिक्रिया (A) में, सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था +4 (SO₂ में) से 0 (S में) में बदलती है। यह एक अपचयन है, इसलिए SO₂ एक ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
- अभिक्रिया (B) में, सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था +4 (SO₂ में) से +6 (SO₂Cl₂ में) में बदलती है। यह एक ऑक्सीकरण है, जिसका अर्थ है कि SO₂ Cl₂ को इलेक्ट्रॉन दान करके एक अपचायक के रूप में कार्य करता है।
- अभिक्रिया (C) में, SO₂ एक क्षार के साथ एक अम्लीय ऑक्साइड के रूप में अभिक्रिया करता है, जो एक अम्ल-क्षार अभिक्रिया है, न कि मुख्य रूप से एक रेडॉक्स अभिक्रिया।
- अभिक्रिया (D) में, सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था +4 (SO₂ में) से 0 (S में) में बदलती है। यह एक अपचयन है, इसलिए SO₂ एक ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
प्र3: संपर्क प्रक्रम का विवरण
सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण के लिए संपर्क प्रक्रम में, सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO₃) को सीधे पानी में अवशोषित करने के बजाय 98% H₂SO₄ में अवशोषित किया जाता है। इसका मुख्य कारण है: (A) SO₃ पानी में अघुलनशील है। (B) SO₃ की पानी के साथ सीधी अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है, जिससे H₂SO₄ का घना कोहरा बनता है जिसे संघनित करना मुश्किल होता है। (C) 98% H₂SO₄ SO₃ के जलयोजन के लिए एक बेहतर उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है। (D) यह विधि आर्थिक रूप से कम व्यवहार्य है लेकिन अति-शुद्ध H₂SO₄ का उत्पादन करती है।
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: पानी में SO₃ का सीधा अवशोषण एक अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया की ओर ले जाता है, जिससे सल्फ्यूरिक अम्ल के कणों (H₂SO₄ कोहरा) की एक महीन धुंध पैदा होती है। इस धुंध को संघनित और अलग करना मुश्किल होता है, जिससे उत्पाद का महत्वपूर्ण नुकसान होता है और पर्यावरणीय चिंताएँ बढ़ती हैं। सांद्र H₂SO₄ में SO₃ को अवशोषित करके, ओलियम (H₂S₂O₇) बनता है: SO₃(g) + H₂SO₄(conc.) → H₂S₂O₇(l) (ओलियम) इस ओलियम को फिर वांछित सांद्रता का सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त करने के लिए पानी की एक परिकलित मात्रा के साथ पतला किया जा सकता है: H₂S₂O₇(l) + H₂O(l) → 2H₂SO₄(l) यह दो-चरणीय प्रक्रिया अम्ल धुंध के निर्माण से बचाती है और कुशल उत्पादन सुनिश्चित करती है।
अभिकथन-कारण प्रश्न
निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों में, एक अभिकथन (A) कथन के बाद एक कारण (R) कथन दिया गया है। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनें: (A) A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है। (B) A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है। (C) A सत्य है लेकिन R असत्य है। (D) A असत्य है लेकिन R सत्य है।
प्र1
अभिकथन (A): H₂S, H₂O से अधिक प्रबल अपचायक है। कारण (R): H-S आबंध की आबंध वियोजन एन्थैल्पी H-O आबंध की तुलना में कम होती है।
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: जब हम समूह 16 में ऑक्सीजन से सल्फर की ओर नीचे जाते हैं, तो परमाणु का आकार बढ़ता है। परिणामस्वरूप, H-S आबंध की लंबाई H-O आबंध की लंबाई से अधिक होती है। यह बढ़ी हुई आबंध लंबाई H-O आबंध की तुलना में H-S आबंध के लिए आबंध वियोजन एन्थैल्पी में कमी लाती है (H-S आबंध एन्थैल्पी ~347 kJ/mol है, H-O आबंध एन्थैल्पी ~463 kJ/mol है)। एक कमजोर H-S आबंध का मतलब है कि इसे अधिक आसानी से तोड़ा जा सकता है, जिससे सल्फर आसानी से इलेक्ट्रॉन खो सकता है (ऑक्सीकृत हो सकता है) और इस प्रकार एक प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करता है। इसलिए, H₂S, H₂O से एक प्रबल अपचायक है, और H-S आबंध की कम आबंध वियोजन एन्थैल्पी इसे सही ढंग से समझाती है।
प्र2
अभिकथन (A): सांद्र H₂SO₄ एक प्रबल निर्जलीकारक है। कारण (R): सांद्र H₂SO₄ में जल के अणुओं के लिए प्रबल बंधुता होती है।
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल में पानी के लिए अत्यधिक प्रबल बंधुता होती है, मुख्य रूप से उच्च जलयोजन एन्थैल्पी (अर्थात, पानी के साथ प्रबल ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया) के कारण। यह गुण इसे विभिन्न पदार्थों से पानी को प्रभावी ढंग से निकालने की अनुमति देता है, जिसमें कार्बनिक यौगिक (जैसे, चीनी का चारण, इथेनॉल का निर्जलीकरण) और यहाँ तक कि यौगिकों से पानी के तत्व भी शामिल हैं। जल के अणुओं के प्रति यह प्रबल बंधुता ही वह सटीक कारण है कि यह एक शक्तिशाली निर्जलीकारक के रूप में कार्य करता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्र1: सल्फर और ऑक्सीजन में श्रृंखलन
समझाइए कि सल्फर ऑक्सीजन की तुलना में बहुत अधिक सीमा तक श्रृंखलन क्यों प्रदर्शित करता है।
मॉडल उत्तर: श्रृंखलन किसी तत्व की अपने ही परमाणुओं के साथ आबंध बनाने की क्षमता है, जिससे श्रृंखला या वलय का निर्माण होता है। ऑक्सीजन और सल्फर दोनों समूह 16 से संबंधित हैं, लेकिन उनकी श्रृंखलन क्षमताएं काफी भिन्न हैं:
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ऑक्सीजन: ऑक्सीजन बहुत सीमित श्रृंखलन प्रदर्शित करता है, मुख्य रूप से O₂ अणु और, कुछ हद तक, ओजोन (O₃) और हाइड्रोजन पेरोक्साइड (H₂O₂) बनाता है। O-O एकल आबंध एन्थैल्पी (लगभग 146 kJ/mol) अपेक्षाकृत कम होती है। इसका कारण ऑक्सीजन परमाणुओं का छोटा आकार है, जिसके परिणामस्वरूप एक श्रृंखला में आसन्न ऑक्सीजन परमाणुओं के बीच प्रबल एकाकी युग्म-एकाकी युग्म प्रतिकर्षण होता है, जिससे लंबी श्रृंखलाएं अस्थिर हो जाती हैं।
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सल्फर: सल्फर व्यापक श्रृंखलन प्रदर्शित करता है, स्थिर S₈ मुड़ी हुई वलय (विषमलंबाक्ष और एकनताक्ष सल्फर में पाई जाती हैं) और यहां तक कि लंबी बहुलक श्रृंखलाएं (जैसे प्लास्टिक सल्फर में) बनाता है। S-S एकल आबंध एन्थैल्पी (लगभग 213 kJ/mol) O-O आबंध एन्थैल्पी की तुलना में काफी अधिक होती है। सल्फर का बड़ा परमाणु आकार आसन्न सल्फर परमाणुओं के बीच एकाकी युग्म-एकाकी युग्म प्रतिकर्षण को कम करता है। यह मजबूत और अधिक स्थिर S-S एकल आबंधों की अनुमति देता है, जिससे विविध और स्थिर बहुपरमाण्विक संरचनाओं के निर्माण में सुविधा होती है।
प्र2: सल्फर डाइऑक्साइड की अम्लीय प्रकृति
सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) की अम्लीय प्रकृति का वर्णन कीजिए। संबंधित रासायनिक समीकरण लिखिए।
मॉडल उत्तर: सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एक विशिष्ट अम्लीय ऑक्साइड है। इसकी अम्लीय प्रकृति निम्नलिखित अभिक्रियाओं से स्पष्ट है:
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पानी के साथ अभिक्रिया: SO₂ पानी में घुल कर सल्फ्यूरस अम्ल (H₂SO₃) बनाता है, जो एक दुर्बल द्विप्रोटिक अम्ल है। यही कारण है कि SO₂ का जलीय विलयन नीले लिटमस को लाल कर देता है। SO₂(g) + H₂O(l) ⇌ H₂SO₃(aq)
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क्षारों के साथ अभिक्रिया: एक अम्लीय ऑक्साइड होने के कारण, SO₂ आसानी से क्षारों के साथ अभिक्रिया करके सल्फाइट बनाता है। उदाहरण के लिए, यह सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया करके सोडियम सल्फाइट बनाता है: SO₂(g) + 2NaOH(aq) → Na₂SO₃(aq) + H₂O(l) यदि विलयन में अतिरिक्त SO₂ प्रवाहित की जाती है, तो सल्फाइट आगे अभिक्रिया करके बाईसल्फाइट बना सकता है: Na₂SO₃(aq) + H₂O(l) + SO₂(g) → 2NaHSO₃(aq)
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क्षारीय ऑक्साइडों के साथ अभिक्रिया: SO₂ क्षारीय ऑक्साइडों के साथ भी अभिक्रिया करके सल्फाइट बनाता है। इस गुण का उपयोग औद्योगिक प्रक्रियाओं जैसे फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन में किया जाता है, जहाँ SO₂ को निकास गैसों से कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) या कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (बुझा हुआ चूना) के साथ अभिक्रिया करके हटाया जाता है: SO₂(g) + CaO(s) → CaSO₃(s) SO₂(g) + CaCO₃(s) → CaSO₃(s) + CO₂(g)
ये अभिक्रियाएं सल्फर डाइऑक्साइड के अम्लीय चरित्र को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करती हैं।
उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल (HOTS) प्रश्न
प्र: H₂S गैस को सुखाना
सांद्र H₂SO₄ का उपयोग आमतौर पर H₂S गैस को सुखाने के लिए नहीं किया जाता है। संबंधित रासायनिक समीकरणों सहित कारण समझाइए। यदि H₂SO₄ नहीं, तो कौन सा अन्य शुष्कन कर्मक उपयोग किया जा सकता है?
विस्तृत रासायनिक व्याख्या: सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) एक शक्तिशाली निर्जलीकारक है, लेकिन यह हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S) गैस को सुखाने के लिए अनुपयुक्त है। इसका मुख्य कारण यह है कि सांद्र H₂SO₄ एक प्रबल ऑक्सीकारक भी है, जबकि H₂S एक प्रबल अपचायक है। जब ये दोनों पदार्थ संपर्क में आते हैं, तो साधारण निर्जलीकरण के बजाय एक रेडॉक्स अभिक्रिया होती है, जिससे H₂S का उपभोग होता है और अवांछनीय उप-उत्पादों का निर्माण होता है।
रासायनिक समीकरण: अभिक्रिया में H₂S का ऑक्सीकरण (सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था -2 से 0 में बदलती है) और H₂SO₄ का अपचयन (सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था +6 से +4 में बदलती है) शामिल है। इस अभिक्रिया का एक सामान्य निरूपण है: H₂S(g) + H₂SO₄(conc.) → S(s) + SO₂(g) + 2H₂O(l) इस अभिक्रिया में, H₂S मौलिक सल्फर (S) में ऑक्सीकृत हो जाता है, और H₂SO₄ सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) में अपचयित हो जाता है। यह न केवल H₂S को सुखाने में विफल रहता है बल्कि ठोस सल्फर और एक और गैस (SO₂) भी उत्पन्न करता है, जिससे प्रक्रिया जटिल हो जाती है।
वैकल्पिक शुष्कन कर्मक: चूँकि H₂S एक अपचायक और एक दुर्बल अम्ल भी है, इसलिए उपयुक्त शुष्कन कर्मक होने चाहिए:
- गैर-ऑक्सीकारक: रेडॉक्स अभिक्रियाओं को रोकने के लिए।
- गैर-क्षारीय: अम्ल-क्षार अभिक्रियाओं से बचने के लिए।
इसलिए, उदासीन और गैर-ऑक्सीकारक शुष्कन कर्मक पसंद किए जाते हैं। अच्छे विकल्पों में शामिल हैं:
- निर्जल फास्फोरस पेंटोक्साइड (P₂O₅): यह एक बहुत प्रभावी निर्जलीकारक है और सामान्य परिस्थितियों में H₂S के साथ अभिक्रिया नहीं करता है।
- निर्जल मैग्नीशियम सल्फेट (MgSO₄): एक उदासीन लवण जो एक अच्छे शुष्कन कर्मक के रूप में कार्य करता है।
- सिलिका जेल: सिलिकॉन डाइऑक्साइड का एक झरझरा रूप जो नमी को प्रभावी ढंग से अवशोषित करता है।
संलयित निर्जल कैल्शियम क्लोराइड (CaCl₂) से आमतौर पर बचा जाता है क्योंकि यह H₂S के साथ एक अस्थिर एडक्ट (CaCl₂·xH₂S) बना सकता है, हालांकि इसकी अभिक्रियाशीलता H₂SO₄ की तुलना में कम गंभीर है। H₂S को सुखाने के लिए सबसे अधिक अनुशंसित और सबसे सुरक्षित विकल्प निर्जल P₂O₅ है।