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यूरेनियम (U): गुणधर्म, अभिक्रियाएँ और उपयोग

By Periodic Table India
CBSE / JEE Prep Notes
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परिचय: यूरेनियम क्यों महत्वपूर्ण है

यूरेनियम (U) एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रेडियोधर्मी तत्व है, जिसे मुख्य रूप से परमाणु ऊर्जा उत्पादन और परमाणु हथियारों में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है। इसके अद्वितीय परमाणु गुणधर्म, विशेष रूप से इसके समस्थानिक यूरेनियम-235 की विखंडनशीलता (fissionability), इसे आधुनिक ऊर्जा उत्पादन और रणनीतिक रक्षा में एक महत्वपूर्ण संसाधन बनाती है। इसके परमाणु अनुप्रयोगों से परे, यूरेनियम का एक भारी धातु और एक एक्टिनाइड तत्व के रूप में रासायनिक व्यवहार दिलचस्प रासायनिक विशेषताएँ प्रस्तुत करता है।

CBSE/JEE त्वरित पुनरीक्षण नोट्स

  • परमाणु संख्या (Z): 92
  • परमाणु द्रव्यमान: लगभग 238.0289 u (सबसे प्रचुर समस्थानिक, यूरेनियम-238 के लिए)
  • प्रतीक: U
  • समूह: एक्टिनाइड्स (f-ब्लॉक तत्वों का हिस्सा)
  • आवर्त: 7
  • ब्लॉक: f-ब्लॉक
  • प्रकृति: चांदी-सफेद, चमकदार, भारी धातु; अत्यधिक रेडियोधर्मी; हवा में तेजी से धूमिल होता है।
  • सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: +3, +4, +5, +6। सबसे स्थिर और सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ +4 (यूरेनियम(IV) या यूरेनस) और +6 (यूरेनियम(VI) या यूरेनिल) हैं।
  • प्रमुख समस्थानिक: यूरेनियम-235 ({235}^\{235\}U) विखंडनीय (fissile) है, जिसका अर्थ है कि यह एक परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया को बनाए रख सकता है। यूरेनियम-238 ({238}^\{238\}U) सबसे प्रचुर समस्थानिक है और उर्वर (fertile) है, जिसका अर्थ है कि इसे विखंडनीय प्लूटोनियम-239 ({239}^\{239\}Pu) में परिवर्तित किया जा सकता है।

इलेक्ट्रॉन विन्यास और आबंध व्यवहार

इलेक्ट्रॉन विन्यास

यूरेनियम का मूल अवस्था इलेक्ट्रॉन विन्यास है: [Rn] 5f³ 6d¹ 7s²

  • स्पष्टीकरण: 6d¹ इलेक्ट्रॉन के बावजूद, यूरेनियम को एक f-ब्लॉक तत्व (एक्टिनाइड) के रूप में वर्गीकृत किया गया है क्योंकि 5f ऑर्बिटल्स भरे जा रहे हैं। 5f, 6d और 7s ऑर्बिटल्स के ऊर्जा स्तर बहुत करीब होते हैं, जिससे जटिल इलेक्ट्रॉनिक संरचनाएँ और परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ उत्पन्न होती हैं।

आबंध व्यवहार

  • ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:
    • +3: 7s² और एक 5f इलेक्ट्रॉन के नुकसान से प्राप्त। यूरेनियम(III) यौगिक (उदाहरण के लिए, UCl₃) आमतौर पर अपचायक होते हैं और आसानी से ऑक्सीकृत हो जाते हैं।
    • +4: 7s² और 6d¹ इलेक्ट्रॉन, साथ ही एक 5f इलेक्ट्रॉन के नुकसान से प्राप्त। यूरेनियम(IV) यौगिक (उदाहरण के लिए, UO₂, UCl₄) अम्लीय घोलों में अपेक्षाकृत स्थिर होते हैं और सामान्य हैं।
    • +5: कम सामान्य और अक्सर असमानुपातन (disproportionates) होता है।
    • +6: सबसे स्थिर और सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था। 7s², 6d¹ और सभी 5f इलेक्ट्रॉनों को खोने से प्राप्त होती है। यूरेनियम(VI) मुख्य रूप से जलीय घोलों और कई यौगिकों (उदाहरण के लिए, UO₃, UO₂(NO₃)₂) में रैखिक यूरेनिल आयन (UO₂²⁺) के रूप में मौजूद होता है।
  • आबंध का प्रकार: यूरेनियम यौगिकों में आबंध मुख्य रूप से आयनिक (कम ऑक्सीकरण अवस्थाओं में या अत्यधिक विद्युत् ऋणात्मक तत्वों के साथ) से लेकर महत्वपूर्ण सहसंयोजक प्रकृति (विशेषकर +6 अवस्था में, जैसा कि यूरेनिल आयन में देखा जाता है) तक हो सकता है। समन्वय संकुल (coordination complexes) सामान्य हैं।

महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ

1. वायु/ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया

यूरेनियम धातु हवा में तेजी से धूमिल होती है, जिससे विभिन्न ऑक्साइड बनते हैं। 3U(s) + 4O₂(g) → U₃O₈(s) (यूरेनियम ऑक्टाऑक्साइड, सबसे स्थिर ऑक्साइड) कम तापमान पर, UO₂ बन सकता है: U(s) + O₂(g) → UO₂(s) (यूरेनियम डाइऑक्साइड)

2. जल के साथ अभिक्रिया

यूरेनियम ठंडे पानी के साथ धीरे-धीरे और गर्म पानी या भाप के साथ तेजी से अभिक्रिया करके यूरेनियम डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाता है। U(s) + 2H₂O(l) → UO₂(s) + 2H₂(g)

3. अम्लों के साथ अभिक्रिया

  • अन-ऑक्सीकरणकारी अम्ल (जैसे, HCl): यूरेनियम अन-ऑक्सीकरणकारी अम्लों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन और यूरेनियम(IV) लवण बनाता है, हालांकि U(III) एक मध्यवर्ती हो सकता है। U(s) + 4HCl(aq) → UCl₄(aq) + 2H₂(g)
  • ऑक्सीकरणकारी अम्ल (जैसे, HNO₃): ऑक्सीकरणकारी अम्लों के साथ, यूरेनियम उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाओं में ऑक्सीकृत हो जाता है, अक्सर यूरेनिल आयन (UO₂²⁺) युक्त यौगिक बनाता है। U(s) + 8HNO₃(dilute) → UO₂(NO₃)₂(aq) + 4NO₂(g) + 4H₂O(l) (यूरेनिल नाइट्रेट का निर्माण)

4. हैलोजेन के साथ अभिक्रिया

यूरेनियम सीधे हैलोजेन के साथ अभिक्रिया करके हैलाइड बनाता है। यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (UF₆) समस्थानिक संवर्धन (isotope enrichment) के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

  • फ्लोरिन के साथ: U(s) + 3F₂(g) → UF₆(g) (यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड)
  • क्लोरीन के साथ: U(s) + 2Cl₂(g) → UCl₄(s) (यूरेनियम टेट्राक्लोराइड)

5. नाभिकीय विखंडन (एक नाभिकीय प्रक्रिया)

यद्यपि यह एक रासायनिक अभिक्रिया नहीं है, नाभिकीय विखंडन यूरेनियम से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। जब यूरेनियम-235 जैसे एक विखंडनीय समस्थानिक एक न्यूट्रॉन को अवशोषित करता है, तो उसका नाभिक छोटे नाभिकों में विभाजित हो जाता है, जिससे अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा और अधिक न्यूट्रॉन निकलते हैं, जिसके परिणामस्वरूप एक श्रृंखला अभिक्रिया होती है। $^\{1\}$n + $^\{235\}$U \rightarrow विखंडन उत्पाद + 2-3$^\{1\}$n + ऊर्जा

औद्योगिक और जैविक महत्व

औद्योगिक महत्व

  • नाभिकीय ईंधन: यूरेनियम का प्राथमिक औद्योगिक उपयोग परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों में ईंधन के रूप में है। समृद्ध यूरेनियम (जिसमें {235}^\{235\}U का उच्च प्रतिशत होता है) का उपयोग नियंत्रित नाभिकीय विखंडन के माध्यम से बिजली उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
  • परमाणु हथियार: अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम (HEU) परमाणु हथियारों के डिजाइन में एक प्रमुख घटक है क्योंकि इसमें विस्फोटक श्रृंखला अभिक्रिया को बनाए रखने की क्षमता होती है।
  • क्षीण यूरेनियम (Depleted Uranium): यूरेनियम-238, जो {235}^\{235\}U के संवर्धन प्रक्रिया के बाद बचता है, क्षीण यूरेनियम कहलाता है। इसका उपयोग कवच-भेदी प्रक्षेप्य (armor-piercing projectiles), विकिरण परिरक्षण (radiation shielding), और विमानों में प्रतिभार (counterweights) के रूप में इसकी उच्च घनत्व के कारण किया जाता है।
  • रेडियोआइसोटोप उत्पादन: यूरेनियम विखंडन उत्पाद विभिन्न रेडियोआइसोटोप के स्रोत हैं जिनका उपयोग चिकित्सा, उद्योग और अनुसंधान में किया जाता है।
  • ऐतिहासिक उपयोग: ऐतिहासिक रूप से, यूरेनियम यौगिकों का उपयोग कांच और सिरेमिक में पीले-नारंगी वर्णक (pigments) के रूप में किया जाता था।

जैविक महत्व

  • कोई ज्ञात जैविक भूमिका नहीं: यूरेनियम की किसी भी जीव में कोई ज्ञात आवश्यक जैविक भूमिका नहीं है।
  • विषाक्तता: यूरेनियम रासायनिक रूप से विषाक्त और रेडियोलॉजिकल रूप से खतरनाक दोनों है।
    • रासायनिक विषाक्तता: एक भारी धातु के रूप में, यह गुर्दे की क्षति, हड्डी की क्षति और न्यूरोलॉजिकल प्रभाव पैदा कर सकता है। सामान्य एक्सपोजर स्तरों पर इसकी रासायनिक विषाक्तता अक्सर इसकी रेडियोधर्मिता की तुलना में अधिक तात्कालिक चिंता का विषय होती है।
    • विकिरण संबंधी खतरा: इसकी रेडियोधर्मिता एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती है, अल्फा कण उत्सर्जन के कारण कैंसर और आनुवंशिक क्षति की संभावना बढ़ जाती है। यह हड्डियों और कोमल ऊतकों में जमा हो सकता है।