नोबेलियम (नहीं)
नोबेलियम: विवाद का तत्व
नोबेलियम एक कृत्रिम, रेडियोधर्मी धातु है जो प्रकृति में नहीं पाई जाती। इसकी केवल अल्प मात्रा - एक बार में केवल कुछ परमाणु - ही बनाई गई है। केवल 58 मिनट की अर्धायु के साथ, यह शीघ्र ही क्षय हो जाता है और वैज्ञानिक अनुसंधान के अलावा इसका कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है। इस तत्व का नाम डायनामाइट के आविष्कारक और नोबेल पुरस्कारों के संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर रखा गया है।
एक मानव निर्मित तत्व
नोबेलियम एक कण त्वरक में बनता है, जहाँ वैज्ञानिक क्यूरियम परमाणुओं पर कार्बन आयनों की बौछार करते हैं। इससे नाभिक आपस में जुड़कर एक नया, भारी तत्व बनाते हैं: नोबेलियम।
नोबेलियम का इतिहास
रसायन विज्ञान में नोबेलियम की खोज सबसे विवादास्पद कहानियों में से एक है, जिसका श्रेय कई टीमों ने लिया है:
1956: जॉर्जी फ्लेरोव के नेतृत्व में एक रूसी समूह ने प्लूटोनियम पर ऑक्सीजन की बौछार करके तत्व 102 का उत्पादन किया, लेकिन उन्होंने आधिकारिक तौर पर अपने परिणामों की घोषणा नहीं की।
1957: स्टॉकहोम स्थित नोबेल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स के वैज्ञानिकों ने घोषणा की कि उन्होंने इस तत्व की खोज कर ली है, लेकिन बाद में उनका दावा गलत साबित हुआ।
1958: लॉरेंस बर्कले प्रयोगशाला (अमेरिका) में, अल्बर्ट घियोर्सो और उनकी टीम ने खोज का दावा किया, लेकिन रूसियों ने इसे चुनौती दी।
1962-63: डबना स्थित संयुक्त परमाणु अनुसंधान संस्थान (JINR) की रूसी टीम ने नोबेलियम के कई समस्थानिकों का सफलतापूर्वक निर्माण और पहचान की, जिससे उनके पहले के काम की पुष्टि हुई।
1997: इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री (IUPAC) ने आधिकारिक तौर पर JINR टीम को असली खोजकर्ता के रूप में श्रेय दिया।