नेपच्यूनियम (Np)
नेपच्यूनियम: पहला ट्रांसयूरेनियम तत्व
नेपच्यूनियम एक रेडियोधर्मी धातु है और यूरेनियम से भारी होने के कारण खोजा गया पहला तत्व है—जिससे इसे पहला ट्रांसयूरेनियम तत्व का खिताब मिला। यूरेनियम की तरह, इसका नाम भी ग्रहों के नाम पर रखा गया है: यूरेनस (यूरेनियम) के बाद नेपच्यून (नेपच्यूनियम) आता है। इसका कोई खास दैनिक उपयोग नहीं है, लेकिन परमाणु विज्ञान में यह महत्वपूर्ण है।
एक मानव निर्मित तत्व
हालाँकि यूरेनियम अयस्कों में नेपच्यूनियम के सूक्ष्म अंश प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं, लेकिन इसका उत्पादन ज़्यादातर कृत्रिम रूप से किया जाता है। आजकल, यह परमाणु रिएक्टरों में एक उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है, जहाँ इसे खर्च किए गए यूरेनियम ईंधन छड़ों से निकाला जाता है।
सबसे आम समस्थानिक, नेपच्यूनियम-237, न्यूट्रॉन डिटेक्टरों और परमाणु प्रतिक्रियाओं पर शोध के लिए उपयोग किया जाता है।
नेपच्यूनियम की जैविक भूमिका
जीवों में नेपच्यूनियम की कोई भूमिका नहीं है। अन्य रेडियोधर्मी तत्वों की तरह, यह विषैला और खतरनाक है।
खोज का इतिहास
नेप्टुनियम की खोज की कहानी एक चूका हुआ अवसर और एक वैज्ञानिक सफलता दोनों है:
1934: इतालवी भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने एक नया तत्व बनाने की उम्मीद में यूरेनियम पर न्यूट्रॉन की बौछार की। लेकिन, अनजाने में ही उन्होंने परमाणु विखंडन शुरू कर दिया—लेकिन उस समय उन्हें इसकी पहचान नहीं हुई।
1940: कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में, एडविन मैकमिलन और फिलिप एबेल्सन ने यूरेनियम पर धीमे न्यूट्रॉन की बौछार करके एक बिल्कुल नए तत्व की सही पहचान की। उन्होंने अपरिचित विकिरण का पता लगाया और निष्कर्ष निकाला कि उन्होंने नेप्टुनियम का संश्लेषण कर लिया है—यूरेनियम के बाद पहला तत्व।