ज़िंक (Zn)
ज़िंक: दूसरों की सुरक्षा के लिए एक बहुमुखी धातु
ज़िंक एक चांदी-सफेद धातु है जिसका रंग नीला होता है और जो हवा में जल्दी खराब हो जाती है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका एक रक्षक धातु के रूप में है—यह अन्य धातुओं, विशेष रूप से लोहे और स्टील को जंग लगने से बचाने के लिए उन पर परत चढ़ाती है।
ज़िंक क्यों उपयोगी है?
ज़िंक की मज़बूती इसकी ढाल, मज़बूती और सहारा देने की क्षमता से आती है:
गैल्वनीकरण: ज़्यादातर ज़िंक का उपयोग स्टील और लोहे पर परत चढ़ाने के लिए किया जाता है, जिससे एक सुरक्षात्मक परत बनती है जो जंग लगने से बचाती है। इस प्रक्रिया का उपयोग कार बॉडी, स्ट्रीट लैंप, सस्पेंशन ब्रिज और अनगिनत रोज़मर्रा की चीज़ों के लिए किया जाता है।
डाई-कास्टिंग: ज़िंक का व्यापक रूप से ऑटो, इलेक्ट्रिकल और हार्डवेयर उद्योगों के लिए डाई-कास्ट पुर्जे बनाने में उपयोग किया जाता है।
मिश्र धातु: ज़िंक अन्य धातुओं के साथ मिलकर पीतल (ज़िंक + तांबा) और निकल सिल्वर जैसी उपयोगी मिश्र धातुएँ बनाता है।
यौगिक: ज़िंक ऑक्साइड का उपयोग पेंट, रबर, सनस्क्रीन, सौंदर्य प्रसाधनों और दवाओं में किया जाता है, जबकि ज़िंक सल्फाइड अंधेरे में चमकने वाले पेंट और फ्लोरोसेंट लाइटों में पाया जाता है।
जैविक भूमिका
ज़िंक जीवन के लिए आवश्यक है। यह 20 से ज़्यादा एंजाइमों का हिस्सा है जो हमारे शरीर को सुचारू रूप से चलाते हैं। औसत मानव शरीर में लगभग 2.5 ग्राम ज़िंक होता है, और हमें प्रतिदिन लगभग 15 मिलीग्राम ज़िंक की आवश्यकता होती है, जो हमें मांस, मछली, बीज और पनीर जैसे खाद्य पदार्थों से मिलता है। हालाँकि, बहुत अधिक ज़िंक हानिकारक हो सकता है।
प्राकृतिक प्रचुरता
ज़िंक, ज़िंक ब्लेंड (ज़िंक सल्फाइड) और कैलामाइन (ज़िंक सिलिकेट) जैसे खनिजों में पाया जाता है। प्रमुख खनन क्षेत्रों में चीन, ऑस्ट्रेलिया और पेरू शामिल हैं। यह धातु इसके अयस्कों को भूनकर और उन्हें शुद्ध ज़िंक में परिवर्तित करके प्राप्त की जाती है।
खोज का इतिहास
प्राचीन उपयोग: ज़िंक के यौगिक रोमनों को ज्ञात थे, और 1100-1500 ईस्वी तक, भारत और चीन में बड़े पैमाने पर ज़िंक का शोधन हो रहा था।
1746 - आधिकारिक खोज: जर्मन रसायनज्ञ एंड्रियास मार्गग्राफ यूरोप में ज़िंक को एक नई धातु के रूप में पहचानने वाले पहले व्यक्ति थे, जिससे इसकी पहचान की पुष्टि हुई।