प्रोटैक्टीनियम (Pa)
प्रोटैक्टीनियम: रेडियोधर्मी पूर्वज
प्रोटैक्टीनियम एक चांदी जैसी, अत्यधिक रेडियोधर्मी धातु है। इसका नाम ग्रीक शब्दों प्रोटोस (“प्रथम” या “जनक”) और एक्टिनियम से मिलकर बना है, क्योंकि यह क्षय होकर एक्टिनियम तत्व में बदल जाता है। अपनी प्रबल रेडियोधर्मिता के कारण यह अत्यंत दुर्लभ और अत्यधिक विषैला होता है, इसलिए इसका उपयोग केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किया जाता है।
प्रोटैक्टीनियम का संक्षिप्त इतिहास
थोरियम और यूरेनियम के बीच एक तत्व की संभावना की भविष्यवाणी दिमित्री मेंडेलीव ने की थी, लेकिन दशकों बाद ही इसकी पुष्टि हुई।
1913: जर्मन वैज्ञानिक कासिमिर फजान्स और ओटो गोहरिंग ने इस तत्व के एक अल्पकालिक समस्थानिक की पहचान की। उन्होंने इसकी बहुत कम अर्धायु के कारण इसका नाम ब्रेवियम रखा।
1918: लीज़ माइटनर और उनकी टीम ने बर्लिन में यूरेनियम अयस्क से एक दीर्घजीवी समस्थानिक, प्रोटैक्टीनियम-231 (अर्ध-आयु: 32,500 वर्ष) पृथक किया, जिससे इस तत्व को आवर्त सारणी में स्थान मिला।
1934: एरिस्टिड वॉन ग्रोस शुद्ध प्रोटैक्टीनियम धातु का पहला नमूना तैयार करने में सफल रहे।
प्राकृतिक प्रचुरता और जैविक भूमिका
प्रोटैक्टीनियम प्रकृति में अल्प मात्रा में पाया जाता है, आमतौर पर यूरेनियम अयस्कों में रेडियोधर्मी क्षय श्रृंखलाओं के भाग के रूप में। इसे व्ययित परमाणु ईंधन छड़ों से भी निकाला जा सकता है।
प्रोटैक्टीनियम की कोई जैविक भूमिका नहीं है। इसकी अत्यधिक रेडियोधर्मिता इसे अत्यधिक विषैला और संभालने में खतरनाक बनाती है।