थैलियम (Tl)
थैलियम: मुलायम, ज़हरीली धातु
थैलियम एक मुलायम, चांदी जैसी सफ़ेद धातु है जो हवा में जल्दी फीकी पड़ जाती है। यह बेहद ज़हरीली होती है, जिसकी वजह से आधुनिक समय में इसका इस्तेमाल सीमित हो गया है। इसका नाम ग्रीक शब्द थैलोस से आया है, जिसका अर्थ है “हरा अंकुर”, क्योंकि यह वर्णक्रमीय विश्लेषण में एक चमकदार हरी रेखा बनाता है।
थैलियम क्यों उपयोगी है?
ज़हरीला होने के बावजूद, थैलियम के अनोखे गुण इसे कुछ उद्योगों में मूल्यवान बनाते हैं:
इलेक्ट्रॉनिक्स: प्रकाश-विद्युत कोशिकाओं में प्रयुक्त, जो प्रकाश को विद्युत में परिवर्तित करती हैं।
काँच: थैलियम ऑक्साइड उच्च अपवर्तनांक वाला काँच बनाता है, जो प्रकाशिक लेंसों के लिए आदर्श है। इसका उपयोग विशेष कम गलनांक वाले काँचों में भी किया जाता है जो बहुत कम तापमान पर भी तरल रहते हैं।
निम्न-तापमान मिश्रधातु: 8% थैलियम युक्त पारे की मिश्रधातु का गलनांक -60°C (अकेले पारे से 20°C कम) होता है। यह इसे कम तापमान वाले थर्मामीटर और स्विच में उपयोगी बनाता है।
कीटनाशक (ऐतिहासिक उपयोग): थैलियम सल्फेट का कभी चूहे मारने के ज़हर के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता था, क्योंकि यह गंधहीन और स्वादहीन होता है। हालाँकि, इसकी उच्च विषाक्तता के कारण अधिकांश देशों में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है।
जैविक भूमिका और प्राकृतिक प्रचुरता
थैलियम की कोई जैविक भूमिका नहीं है और यह मनुष्यों के लिए बेहद खतरनाक है। यह शरीर में पोटेशियम की जगह ले सकता है, तंत्रिका तंत्र को बाधित कर सकता है, और कैंसर तथा जन्म दोषों से जुड़ा है।
यह कई अयस्कों, विशेष रूप से पाइराइट्स (सल्फ्यूरिक एसिड के उत्पादन में प्रयुक्त) में अल्प मात्रा में पाया जाता है। अधिकांश व्यावसायिक थैलियम तांबा, जस्ता और सीसा शोधन के उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
खोज का इतिहास
1861 - प्रथम संकेत: अंग्रेज़ रसायनज्ञ विलियम क्रुक्स ने अशुद्ध सल्फ्यूरिक एसिड का विश्लेषण करते समय एक चमकीली हरी वर्णक्रमीय रेखा का पता लगाया, जिससे एक नए तत्व की उपस्थिति का पता चला।
1862 - पृथक्करण: फ्रांसीसी रसायनज्ञ क्लॉड-ऑगस्ट लैमी ने अधिक विस्तृत शोध किया और शुद्ध धात्विक थैलियम का पृथक्करण करने वाले पहले व्यक्ति थे। उनके गहन शोध के कारण, फ्रांसीसी अकादमी ने उन्हें इस खोज का श्रेय दिया।
अंततः, क्रूक्स और लैमी दोनों को उनके योगदान के लिए पदक प्रदान किए गए।