ऑक्सीजन (O)
ऑक्सीजन: जीवनदायी तत्व
ऑक्सीजन एक रंगहीन, गंधहीन गैस है जो पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह हमारे वायुमंडल का लगभग 21% हिस्सा बनाती है और इतनी प्रतिक्रियाशील होती है कि अन्य तत्वों के साथ मिलकर, इसका द्रव्यमान पृथ्वी की पपड़ी के लगभग आधे हिस्से के बराबर होता है।
ऑक्सीजन के उपयोग
ऑक्सीजन उद्योग, चिकित्सा और दैनिक जीवन में सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले तत्वों में से एक है।
औद्योगिक उत्पादन: ऑक्सीजन का उपयोग नाइट्रिक एसिड और हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे रसायनों के साथ-साथ एपॉक्सीएथेन (एंटीफ्रीज़ के लिए) और क्लोरोएथीन (पीवीसी प्लास्टिक के लिए कच्चा माल) बनाने के लिए किया जाता है।
वेल्डिंग और कटिंग: एसिटिलीन के साथ मिश्रित ऑक्सीजन एक अत्यंत गर्म ज्वाला उत्पन्न करती है, जो धातुओं की वेल्डिंग और स्टील को काटने के लिए आदर्श है।
अपशिष्ट उपचार: अतिरिक्त ऑक्सीजन को सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट जल में पंप किया जाता है ताकि सूक्ष्मजीव अपशिष्ट को तेज़ी से विघटित कर सकें।
चिकित्सीय उपयोग: शुद्ध ऑक्सीजन अस्पतालों में अत्यंत महत्वपूर्ण है—नवजात शिशुओं के लिए इनक्यूबेटर में और साँस लेने में तकलीफ़ वाले मरीज़ों की मदद के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
जीवित प्राणियों में ऑक्सीजन
ऑक्सीजन पहली बार पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 2 अरब साल पहले प्रकाश संश्लेषक जीवाणुओं (नीले-हरे शैवाल) द्वारा उत्सर्जित हुई थी।
प्रकाश संश्लेषण: पौधे और शैवाल सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके जल के अणुओं को विभाजित करते हैं, जिससे हवा में ऑक्सीजन मुक्त होती है।
श्वसन: पशु और मनुष्य ऑक्सीजन को साँस के ज़रिए अंदर लेते हैं और इसका उपयोग भोजन से ऊर्जा मुक्त करने के लिए करते हैं, जिससे अपशिष्ट गैस के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है।
जल में: चूँकि ऑक्सीजन जल में घुल जाती है, इसलिए मछलियाँ और अन्य जलीय जीव भी साँस ले सकते हैं।
ऑक्सीजन मानव शरीर में सबसे प्रचुर तत्व भी है, जो हमारे द्रव्यमान का लगभग दो-तिहाई हिस्सा बनाता है।
प्राकृतिक प्रचुरता और इतिहास
ऑक्सीजन पृथ्वी की पपड़ी में सबसे प्रचुर तत्व है (द्रव्यमान के अनुसार 49.2%) और इसका उत्पादन व्यावसायिक रूप से तरल वायु को आसवित करके या विशेष पदार्थों से वायु से नाइट्रोजन निकालकर किया जाता है।
1771: स्वीडिश रसायनज्ञ कार्ल विल्हेम शीले ने ऑक्सीजन का उत्पादन किया, लेकिन अपने परिणाम प्रकाशित नहीं किए।
1774: अंग्रेज़ रसायनज्ञ जोसेफ़ प्रीस्टली ने मरक्यूरिक ऑक्साइड को गर्म करके ऑक्सीजन गैस छोड़ी। उन्होंने देखा कि इससे मोमबत्तियाँ ज़्यादा तेज़ जलती हैं और साँस लेना आसान हो जाता है।
बाद में: फ्रांसीसी रसायनज्ञ एंटोनी लावोज़ियर ने इस गैस का अध्ययन किया, इसे ऑक्सीजन (“अम्ल-निर्माण”) नाम दिया, और श्वसन और दहन में इसकी वास्तविक भूमिका की व्याख्या की।