इरिडियम का परिचय
इरिडियम (Ir), परमाणु संख्या 77, एक उल्लेखनीय रूप से सघन, संक्षारण-प्रतिरोधी और भंगुर संक्रमण धातु है। यह प्लैटिनम समूह धातुओं (PGMs) से संबंधित है और ऑस्मियम के बाद दूसरा सबसे सघन तत्व होने के लिए उल्लेखनीय है। उच्च तापमान पर भी संक्षारण के प्रति इसकी अत्यधिक प्रतिरोधकता, इसे विशेष अनुप्रयोगों में अमूल्य बनाती है जहाँ स्थायित्व और निष्क्रियता सर्वोपरि हैं।
प्राकृतिक उपस्थिति और निष्कर्षण
वैश्विक स्रोत
इरिडियम पृथ्वी की पपड़ी में सबसे दुर्लभ तत्वों में से एक है, जिसकी औसत प्रचुरता केवल 0.001 भाग प्रति मिलियन है। यह उल्कापिंडों में काफी अधिक प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, और क्रेटेशियस-पैलियोजीन (K–Pg) सीमा परत पर विश्व स्तर पर पाई गई इरिडियम विसंगति, डायनासोर के विलुप्त होने में योगदान देने वाली क्षुद्रग्रह टक्कर घटना के लिए मजबूत सबूत प्रदान करती है।
पृथ्वी पर, इरिडियम आमतौर पर प्रकृति में मूल धातु के रूप में या ऑस्मियम (ऑस्मिरिडियम) और प्लैटिनम के साथ प्राकृतिक मिश्र धातुओं में अविभाजित रूप से पाया जाता है। महत्वपूर्ण भंडार अल्ट्रामैफिक आग्नेय चट्टानों में केंद्रित हैं। इरिडियम के विश्व के प्राथमिक स्रोत निम्नलिखित स्थानों पर स्थित हैं:
- दक्षिण अफ्रीका: बुशवेल्ड इग्नेस कॉम्प्लेक्स पृथ्वी पर सबसे बड़ा ज्ञात स्तरित अंतर्वेधन है और इरिडियम सहित प्लैटिनम समूह धातुओं का एक प्रमुख स्रोत है।
- रूस: साइबेरिया में नॉरिल्स्क-तालनाख क्षेत्र एक और महत्वपूर्ण उत्पादक है, जो निकल-कॉपर सल्फाइड अयस्क जमा से जुड़ा है।
- कनाडा: ओंटारियो में सडबरी बेसिन, जो एक उल्कापिंड के प्रभाव से बना था, निकल और तांबे के खनन के उप-उत्पादों के रूप में PGMs भी उत्पन्न करता है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका: मोंटाना में स्टिलवाटर कॉम्प्लेक्स में छोटी मात्रा में पाया जाता है।
निष्कर्षण प्रक्रिया
इरिडियम लगभग विशेष रूप से अन्य धातुओं, मुख्य रूप से निकल और तांबे, और प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य प्लैटिनम समूह धातुओं के खनन और शोधन के दौरान एक उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है। निष्कर्षण प्रक्रिया जटिल है और इसमें कई चरण शामिल हैं:
- सांद्रण: प्रारंभिक क्रशिंग और फ्लोटेशन प्रक्रियाएं थोक अयस्क से PGM-युक्त खनिजों को अलग करती हैं।
- प्रगलन और शोधन: केंद्रित सामग्री शुद्ध निकल और तांबा उत्पन्न करने के लिए प्रगलन और बाद में इलेक्ट्रोलाइटिक शोधन से गुजरती है, जिससे PGMs से भरपूर एनोड कीचड़ पीछे रह जाता है।
- रासायनिक पृथक्करण: PGM-समृद्ध कीचड़ को तब जटिल रासायनिक उपचारों की एक श्रृंखला के अधीन किया जाता है, जिसमें एक्वा रेजिया (नाइट्रिक और हाइड्रोक्लोरिक एसिड का मिश्रण) में घुलनशीलता, विलायक निष्कर्षण और अवक्षेपण प्रतिक्रियाएं शामिल हैं। ये प्रक्रियाएं उनके विभिन्न रासायनिक गुणों के आधार पर व्यक्तिगत PGMs को सावधानीपूर्वक अलग करती हैं। इरिडियम, एक्वा रेजिया के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होने के कारण, अक्सर एक अघुलनशील अवशेष के रूप में पीछे छूट जाता है और फिर इसे आगे संसाधित किया जाता है, जिसमें आमतौर पर सोडियम परऑक्साइड या अन्य मजबूत ऑक्सीडाइज़र के साथ संलयन शामिल होता है ताकि इसे बाद के शुद्धिकरण के लिए घोल में लाया जा सके।
भारतीय संदर्भ
भारत के पास इरिडियम या प्लैटिनम समूह धातु के ऐसे महत्वपूर्ण प्राथमिक भंडार नहीं हैं जो बड़े पैमाने पर खनन के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य हों। ओडिशा में सुकिंदा घाटी जैसे क्षेत्रों में, क्रोमाइट जमा से जुड़े, और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में PGMs की छोटी घटनाएँ बताई गई हैं। हालांकि, ये इरिडियम निष्कर्षण के लिए वाणिज्यिक स्रोत नहीं हैं। नतीजतन, भारत अपनी औद्योगिक मांगों को पूरा करने के लिए इरिडियम और अन्य PGMs के आयात पर पूरी तरह निर्भर है। इन आयातित सामग्रियों का उपयोग तब देश के भीतर विभिन्न विनिर्माण क्षेत्रों में किया जाता है।
इरिडियम के रोज़मर्रा के अनुप्रयोग
इरिडियम के अद्वितीय गुण, विशेष रूप से इसकी अत्यधिक कठोरता, उच्च गलनांक, और संक्षारण तथा घिसाव के प्रति असाधारण प्रतिरोध, इसे कई महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों में अपरिहार्य बनाते हैं जो रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित करते हैं, यद्यपि अक्सर एक अदृश्य घटक के रूप में।
ऑटोमोटिव स्पार्क प्लग
इरिडियम-टिप वाले स्पार्क प्लग भारत भर में कारों, मोटरसाइकिलों और अन्य वाहनों में पाए जाने वाले आधुनिक आंतरिक दहन इंजनों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। इरिडियम का उपयोग पारंपरिक तांबे या प्लैटिनम प्लग की तुलना में बहुत महीन इलेक्ट्रोड की अनुमति देता है। यह छोटा इलेक्ट्रोड आकार विद्युत क्षेत्र को केंद्रित करता है, जिससे अधिक कुशल और शक्तिशाली स्पार्क उत्पन्न होता है, जो इग्निशन विश्वसनीयता में सुधार करता है। इरिडियम का उच्च गलनांक और क्षरण के प्रति प्रतिरोध इन स्पार्क प्लग के जीवनकाल को काफी हद तक बढ़ाता है, रखरखाव की आवृत्ति को कम करता है और ईंधन दक्षता को बढ़ाता है।
पेन निब
उच्च-गुणवत्ता वाले फाउंटेन पेन निब, ऐतिहासिक रूप से और आज भी कुछ लक्जरी पेनों में, बिल्कुल सिरे पर इरिडियम मिश्र धातु से बनी एक छोटी गोली या टिपिंग सामग्री होती है। यह मिश्र धातु कागज की घर्षण क्रिया के खिलाफ असाधारण घिसाव प्रतिरोध प्रदान करती है, जिससे कई वर्षों तक सहज लेखन सुनिश्चित होता है। यद्यपि यह शुद्ध इरिडियम नहीं है, फिर भी इन मिश्र धातुओं को अक्सर “इरिडियम टिप्स” कहा जाता है क्योंकि इरिडियम उनकी कठोरता और दीर्घायु में योगदान देता है।
विद्युत संपर्क
इरिडियम मिश्र धातुओं का उपयोग विशेष विद्युत संपर्कों में किया जाता है, खासकर रिले और स्विच में जहाँ उच्च विश्वसनीयता, आर्सिंग के प्रति प्रतिरोध, और दीर्घकालिक प्रदर्शन महत्वपूर्ण होते हैं। ये संपर्क विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दूरसंचार उपकरण और औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों में पाए जाते हैं। इरिडियम मिश्र धातुओं की मज़बूती यह सुनिश्चित करती है कि लाखों स्विचिंग चक्रों के बाद भी विद्युत कनेक्शन स्थिर और कुशल बने रहें, जिससे कई उपभोक्ता और औद्योगिक उत्पादों के स्थायित्व में योगदान मिलता है।
चिकित्सा उपकरण
इरिडियम-192, इरिडियम का एक रेडियोधर्मी आइसोटोप, ब्रैकीथेरेपी में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है, जो कुछ प्रकार के कैंसर के इलाज के लिए विकिरण चिकित्सा का एक रूप है। इरिडियम-192 के छोटे, कैप्सूल वाले स्रोतों को ट्यूमर के अंदर या उसके पास सटीक रूप से रखा जाता है ताकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों के संपर्क को कम करते हुए सीधे कैंसर कोशिकाओं को विकिरण की उच्च खुराक दी जा सके। रेडियोलॉजी से परे, इरिडियम की जैव-अनुकूलता और संक्षारण प्रतिरोध इसके मिश्र धातुओं को पेसमेकर और अन्य प्रत्यारोपण योग्य चिकित्सा उपकरणों में इलेक्ट्रोड के लिए उपयुक्त बनाते हैं, जिससे मानव शरीर के भीतर उनके विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित होता है।
उच्च-तापमान क्रूसिबल
इसके असाधारण रूप से उच्च गलनांक (2466°C) और रासायनिक हमले के प्रति प्रतिरोध के कारण, इरिडियम का उपयोग एकल क्रिस्टल उगाने के लिए क्रूसिबल बनाने में किया जाता है, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑप्टिक्स उद्योगों में उपयोग होने वाले। उदाहरण के लिए, सिंथेटिक नीलम और गार्नेट क्रिस्टल, जो एलईडी, लेजर सिस्टम और कुछ उच्च-स्तरीय घड़ी के ग्लास जैसे घटकों के लिए आवश्यक हैं, अक्सर इरिडियम क्रूसिबल में उगाए जाते हैं। ये क्रूसिबल क्रिस्टल वृद्धि के लिए आवश्यक अत्यधिक तापमान और संक्षारक वातावरण का सामना करते हैं, जिससे कई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उपकरणों के उत्पादन में एक मौलिक भूमिका निभाते हैं।