थोरियम का परिचय
थोरियम एक रासायनिक तत्व है जिसे आवर्त सारणी पर प्रतीक Th और परमाणु संख्या 90 से दर्शाया जाता है। यह एक स्वाभाविक रूप से पाया जाने वाला, थोड़ा रेडियोधर्मी धातु है। अपने शुद्ध रूप में, थोरियम एक चांदी-सफेद धातु है जो हवा के संपर्क में आने पर काला पड़ जाता है, जिससे थोरियम डाइऑक्साइड बनता है। यह एक्टिनाइड श्रृंखला से संबंधित है, जो आवर्त सारणी के निचले भाग में पाए जाने वाले धात्विक तत्वों का एक समूह है।
खोज और नामकरण
थोरियम तत्व की खोज 1828 में स्वीडिश रसायनज्ञ जोंस जैकब बर्ज़ेलियस (Jöns Jacob Berzelius) ने की थी। उन्होंने नॉर्वे के तट पर एक द्वीप पर पाए गए एक खनिज से इस तत्व को अलग किया। बर्ज़ेलियस ने नए तत्व का नाम ‘थोरियम’ नॉर्स पौराणिक कथाओं में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति, गड़गड़ाहट के नॉर्स देवता थोर (Thor) के सम्मान में रखा।
थोरियम के बारे में त्वरित तथ्य
- थोरियम अधिकांश चट्टानों और मिट्टी में थोड़ी मात्रा में पाया जाता है। यह मोनोज़ाइट रेत जैसे कुछ खनिजों में विशेष रूप से प्रचुर मात्रा में होता है, जो भारत के केरल के तटीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मात्रा में पाए जाते हैं।
- यह एक रेडियोधर्मी तत्व है, जिसका अर्थ है कि इसका परमाणु नाभिक अस्थिर होता है और समय के साथ ऊर्जा और कण छोड़ता है। सबसे आम आइसोटोप, थोरियम-232, का आधा जीवन (half-life) बहुत लंबा होता है, जिसका अर्थ है कि यह अरबों वर्षों में बहुत धीरे-धीरे क्षय होता है।
- ऐतिहासिक रूप से, थोरियम का उपयोग गैस मेंटल (gas mantles) के निर्माण में किया जाता था, जो लौ से गर्म होने पर तेज प्रकाश उत्पन्न करते थे। इसका उच्च गलनांक (melting point) इसे कुछ मिश्र धातुओं में उपयोगी बनाता है।
- थोरियम में परमाणु ईंधन के रूप में क्षमता है। जब न्यूट्रॉन से बमबारी की जाती है, तो थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में परिवर्तित किया जा सकता है, जो विखंडनीय (fissile) है और परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
- थोरियम सीसे से सघन होता है और इसका गलनांक 1750°C (3182°F) होता है, जिससे यह एक दुर्दम्य धातु (refractory metal) बन जाता है।