निहोनियम (Nh): एक सिंथेटिक सुपरहेवी तत्व
निहोनियम (Nh) परमाणु संख्या 113 वाला एक सिंथेटिक रासायनिक तत्व है। इसे एक सुपरहेवी तत्व के रूप में वर्गीकृत किया गया है और यह आवर्त सारणी के p-ब्लॉक से संबंधित है। इसका नाम “निहोन” से लिया गया है, जो जापान के लिए दो जापानी शब्दों में से एक है, जहाँ इस तत्व की खोज की गई थी।
प्राकृतिक घटना और खोज
निहोनियम पृथ्वी पर स्वाभाविक रूप से नहीं पाया जाता है। यह एक विशुद्ध रूप से सिंथेटिक तत्व है, जिसका अर्थ है कि इसे परमाणु प्रतिक्रियाओं के माध्यम से एक प्रयोगशाला में बनाया जाना चाहिए। इसकी खोज एक सहयोगात्मक प्रयास था, जिसमें 2003 में डबना, रूस में जॉइंट इंस्टीट्यूट फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (JINR) से प्रारंभिक दावे किए गए थे, जिसके बाद 2003 और 2004 में जापान में RIKEN की एक टीम द्वारा निर्णायक संश्लेषण और पहचान की गई थी। प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री का अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUPAC) ने 2015 में RIKEN टीम के खोज के दावे को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी।
संश्लेषण और गुण
निहोनियम के संश्लेषण में एक भारी तत्व के लक्ष्य पर हल्के तत्व के आयनों से बमबारी करना शामिल है। उदाहरण के लिए, RIKEN टीम ने जिंक-70 नाभिक को बिस्मथ-209 नाभिक के साथ जोड़कर निहोनियम-278 बनाया। इस प्रक्रिया के लिए अत्यधिक उच्च ऊर्जा और विशेष कण त्वरक की आवश्यकता होती है।
निहोनियम की प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- परमाणु संख्या: 113
- परमाणु द्रव्यमान: लगभग 286 u (सबसे स्थिर ज्ञात समस्थानिक, निहोनियम-286 के लिए)
- अर्ध-जीवन: निहोनियम के समस्थानिक अत्यधिक अस्थिर होते हैं, जिसमें सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले समस्थानिक, निहोनियम-286 का अर्ध-जीवन केवल लगभग 10 सेकंड होता है। अन्य समस्थानिकों का अर्ध-जीवन मिलीसेकंड में मापा जाता है।
- रेडियोधर्मिता: इसके छोटे अर्ध-जीवन के कारण, यह अत्यधिक रेडियोधर्मी है।
- भौतिक अवस्था: कमरे के तापमान पर एक ठोस होने का अनुमान है, हालांकि अब तक केवल कुछ ही परमाणु उत्पन्न हुए हैं।
रोज़मर्रा के उपयोग और औद्योगिक अनुप्रयोग
निहोनियम का कोई सामान्य, रोज़मर्रा का उपयोग नहीं है। इसके अनुप्रयोग वर्तमान में मौलिक वैज्ञानिक अनुसंधान तक सीमित हैं। इसके कारण हैं:
- सिंथेटिक प्रकृति: इसे अत्यधिक विशिष्ट अनुसंधान सुविधाओं में कृत्रिम रूप से बनाया जाना चाहिए।
- अत्यंत छोटा अर्ध-जीवन: इसका क्षणभंगुर अस्तित्व (सेकंड या मिलीसेकंड) इसे इसके निर्माण और तत्काल अध्ययन के बाहर किसी भी व्यावहारिक अनुप्रयोग को रोकता है।
- अत्यल्प मात्रा: निहोनियम के केवल मुट्ठी भर परमाणु ही अब तक उत्पन्न हुए हैं।
इसलिए, भारत या दुनिया में कहीं और कोई औद्योगिक प्रक्रिया नहीं है जिसमें निहोनियम का निष्कर्षण या उपयोग शामिल हो। लोहे (ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में खनन) या तांबे (राजस्थान और झारखंड में खनन) जैसे प्राकृतिक रूप से प्रचुर तत्वों के विपरीत, जिनके विशाल औद्योगिक अनुप्रयोग हैं, निहोनियम की भूमिका केवल परमाणु भौतिकी और सुपरहेवी तत्वों की संरचना के बारे में मानवता की समझ को आगे बढ़ाने में है। वैज्ञानिक आवर्त सारणी की सीमाओं और परमाणु नाभिक को एक साथ बांधने वाले बलों को समझने के लिए निहोनियम का अध्ययन करते हैं।