सेलेनियम को समझना: एक बहुमुखी तत्व
सेलेनियम (Se), परमाणु संख्या 34, एक अधातु है जिसके गुण सल्फर और टेल्यूरियम के बीच के होते हैं। 1817 में जोंस जैकब बर्ज़ेलियस द्वारा खोजा गया, यह अपने अद्वितीय फोटोकंडक्टिव और सेमीकंडक्टिंग गुणों के लिए जाना जाता है, जो इसे विभिन्न औद्योगिक अनुप्रयोगों में मूल्यवान बनाता है और एक ट्रेस पोषक तत्व के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सेलेनियम के रोज़मर्रा के उपयोग
सेलेनियम विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोग पाता है, जो रोज़मर्रा के जीवन को सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण तरीकों से प्रभावित करता है।
एच3. 1. इलेक्ट्रॉनिक्स और फोटोवोल्टिक्स
प्रकाश के संपर्क में आने पर बिजली को अधिक कुशलता से संचालित करने की सेलेनियम की क्षमता इसे एक फोटोकंडक्टर बनाती है। यह गुण ऐतिहासिक रूप से फोटोकॉपियर (ज़ीरोग्राफी) और लाइट मीटर के शुरुआती विकास में महत्वपूर्ण था। इसका उपयोग रेक्टिफायर, उन उपकरणों में भी किया गया है जो प्रत्यावर्ती धारा (AC) को दिष्ट धारा (DC) में परिवर्तित करते हैं, और कुछ प्रकार के सौर सेल में भी, हालांकि बेहतर दक्षता और स्थिरता के कारण कई फोटोवोल्टिक अनुप्रयोगों में सिलिकॉन ने इसे बड़े पैमाने पर बदल दिया है।
एच3. 2. ग्लास विनिर्माण
कांच उद्योग में, सेलेनियम के दो प्राथमिक उद्देश्य होते हैं। लोहे की अशुद्धियों के कारण होने वाले हरे रंग को बेअसर करने के लिए पिघले हुए कांच में थोड़ी मात्रा में सेलेनियम मिलाया जाता है, जिससे स्पष्ट, रंगहीन कांच बनता है। इसके विपरीत, जब उच्च सांद्रता में उपयोग किया जाता है, अक्सर कैडमियम सल्फाइड के संयोजन में, सेलेनियम कांच को एक जीवंत लाल, नारंगी या रूबी रंग प्रदान करता है, जिसे आमतौर पर ट्रैफिक लाइट लेंस, सिग्नल लैंप और सजावटी कांच के बर्तनों में देखा जाता है।
एच3. 3. पिगमेंट
स्थिर, उच्च-प्रदर्शन वाले पिगमेंट के उत्पादन में सेलेनियम यौगिक महत्वपूर्ण हैं। उदाहरण के लिए, कैडमियम सल्फोसेलेनाइड, चमकीले लाल, नारंगी और मैरून रंगों की एक श्रृंखला का उत्पादन करता है जो गर्मी और फीके पड़ने के प्रति प्रतिरोधी होते हैं। इन पिगमेंट का व्यापक रूप से प्लास्टिक, सिरेमिक, पेंट और इनेमल में उपयोग किया जाता है, जो विभिन्न उत्पादों के लिए लंबे समय तक चलने वाला रंग प्रदान करते हैं।
एच3. 4. एंटी-डैंड्रफ शैंपू और फार्मास्यूटिकल्स
सेलेनियम सल्फाइड (SeS₂) कई ओवर-द-काउंटर और प्रिस्क्रिप्शन एंटी-डैंड्रफ शैंपू और सामयिक उपचारों में एक सक्रिय घटक है। इसके एंटीफंगल गुण मैलासेज़िया ग्लोबोसा नामक यीस्ट-जैसे फंगस के विकास को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, जो आमतौर पर डैंड्रफ और सेबोरिक डर्मेटाइटिस से जुड़ा होता है। इसके अतिरिक्त, सेलेनियम मानव स्वास्थ्य के लिए एक आवश्यक ट्रेस तत्व है, और सेलेनियम युक्त सप्लीमेंट्स का उपयोग कमी को दूर करने, प्रतिरक्षा कार्य का समर्थन करने और एक एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करने के लिए किया जाता है।
एच3. 5. धातु विज्ञान और मिश्र धातु
धातु विज्ञान में, सेलेनियम को कुछ मिश्र धातुओं में उनकी मशीनेबिलिटी में सुधार के लिए जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, थोड़ी मात्रा में सेलेनियम स्टेनलेस स्टील की कार्यक्षमता को बढ़ा सकता है, जिससे इसकी ताकत या संक्षारण प्रतिरोध से समझौता किए बिना इसे काटना और आकार देना आसान हो जाता है। यह कुछ विशेष लेड मिश्र धातुओं में उनकी ताकत और कास्टिंग गुणों में सुधार के लिए भी मामूली उपयोग पाता है।
पृथ्वी पर प्राकृतिक उपस्थिति
सेलेनियम आमतौर पर प्रकृति में एक स्वतंत्र तत्व के रूप में नहीं पाया जाता है। यह पृथ्वी की पपड़ी में विरल रूप से वितरित होता है, आमतौर पर लगभग 0.05 से 0.09 पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm) की सांद्रता में। इसकी प्राथमिक प्राकृतिक उपस्थिति अन्य धातुओं, विशेष रूप से तांबा, सीसा, चांदी और सोने के सल्फाइड अयस्कों से जुड़ी है। चाल्कोपीराइट, पाइराइट और गैलेना जैसे खनिजों में अक्सर सेलेनियम एक अशुद्धि के रूप में होता है, जो उनके क्रिस्टल जाली में सल्फर की जगह लेता है।
भारत में, मिट्टी में सेलेनियम का वितरण विभिन्न क्षेत्रों में काफी भिन्न होता है। कुछ क्षेत्रों, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में, मिट्टी में उच्च प्राकृतिक सेलेनियम सामग्री होती है, जिसे फसलें अवशोषित कर सकती हैं। इसके विपरीत, हिमालय और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों जैसे अन्य क्षेत्रों में सेलेनियम-कमी वाली मिट्टी हो सकती है, जिससे पशुधन और स्थानीय उपज पर निर्भर मानव आबादी की पोषण स्थिति प्रभावित हो सकती है। ज्वालामुखी उत्सर्जन और शेल सेलेनियम के अन्य छोटे प्राकृतिक स्रोत हैं।
निष्कर्षण और औद्योगिक उपयोग
व्यावसायिक रूप से, सेलेनियम मुख्य रूप से अन्य धातुओं, विशेष रूप से तांबे के शोधन के दौरान एक उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है। सल्फर के साथ इसकी रासायनिक समानता के कारण, सेलेनियम अक्सर अपने सल्फाइड अयस्कों में तांबे के साथ होता है।
सेलेनियम का प्राथमिक औद्योगिक स्रोत तांबे के इलेक्ट्रोलाइटिक शोधन के दौरान उत्पादित एनोड कीचड़ है। इस प्रक्रिया में, अशुद्ध तांबे के एनोड का इलेक्ट्रोलाइसिस किया जाता है, जिससे तांबा घुल जाता है और कैथोड पर शुद्ध तांबे के रूप में जमा हो जाता है। noble धातु (सोना, चांदी, प्लैटिनम) और सेलेनियम और टेल्यूरियम जैसे अधातु सहित अशुद्धियाँ घुलती नहीं हैं और एनोड कीचड़ के रूप में इलेक्ट्रोलाइटिक सेल के नीचे जमा हो जाती हैं।
एनोड कीचड़ से निष्कर्षण प्रक्रिया में आमतौर पर कई चरण शामिल होते हैं:
- भूनना (Roasting): एनोड कीचड़ को अक्सर सोडा ऐश (सोडियम कार्बोनेट) के साथ भूना जाता है, ताकि सेलेनियम को पानी में घुलनशील सोडियम सेलेनाइट (Na₂SeO₃) या सोडियम सेलेनेट (Na₂SeO₄) में ऑक्सीकृत किया जा सके।
- निक्षालन (Leaching): फिर भूने हुए मिश्रण को पानी से निक्षालित किया जाता है ताकि सेलेनियम यौगिकों को घोला जा सके।
- उदासीनीकरण और अपचयन (Neutralization and Reduction): निक्षालित घोल को उदासीन किया जाता है, और उसमें से सल्फर डाइऑक्साइड गैस (SO₂) या कोई अन्य अपचायक एजेंट गुजारा जाता है। यह सेलेनाइट/सेलेनेट आयनों को वापस तात्विक सेलेनियम में अपचयित करता है, जो लाल या काले पाउडर के रूप में अवक्षेपित हो जाता है।
भारत में, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) जैसी कंपनियाँ, जिनकी घाटशिला (झारखंड) और मलंजखंड (मध्य प्रदेश) जैसे क्षेत्रों में परिचालन हैं, तांबा उत्पादन में शामिल हैं। उनके इलेक्ट्रोलाइटिक तांबा शोधन प्रक्रियाओं के दौरान उत्पन्न होने वाले एनोड कीचड़ सेलेनियम के निष्कर्षण के लिए एक संभावित स्रोत का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे इसकी पुनर्प्राप्ति इन सुविधाओं के लिए एक आर्थिक रूप से व्यवहार्य उद्यम बन जाती है। यह उप-उत्पाद पुनर्प्राप्ति खनन कार्यों से संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करती है।